प्राइमरी से हाई और सेकेंडरी स्कूल अपग्रेड कराने को लेकर
शिक्षा विभाग में एक एकड़ और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग में दो एकड़ की शर्त
चंडीगढ़। हरियाणा में निजी स्कूल संचालक सरकार के दो अलग-अलग विभागों के नियमों के फेर में फंस गए हैं। जमीन उपलब्धता को लेकर दोनों विभागों के अलग-अलग नियम होने के चलते स्कूल प्राइमरी से हाई और सेकेंडरी स्कूल तक अपग्रेड नहीं हो पा रहे हैं। निजी स्कूल संचालकों की फाइलें अटक रही हैं। कई महीने तक चक्कर लगाने के बाद भी फाइलें नहीं निकाली जा रही हैं। इतना ही नहीं, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग में स्कूल संचालकों को अवसंरचना विस्तार शुल्क (इंफ्रास्ट्रक्चर एगेमेंशन चार्जिस) के रूप में तीन लाख रुपये की राशि भी जमा करानी पड़ रही है। मामले को लेकर अब प्राइवेट स्कूल संचालक एकजुट हो गए हैं और जल्द ही नई शिक्षा मंत्री सीमा त्रिखा से मुलाकात करेंगे।
2018 में हरियाणा के शहरी क्षेत्र के कंट्रोल्ड और अप्रूव्ड क्षेत्र में प्राइमरी स्कूल से हाई स्कूल और सेकेंडरी स्कूल अपग्रेड कराने को लेकर दो एकड़ जमीन अनिवार्य थी। लेकिन 2021 में शिक्षा विभाग ने दो एकड़ की शर्त हटाकर इसे एक एकड़ कर दिया। इसको लेकर विभाग ने बाकायदा नोटिफिकेशन भी जारी किया था। साथ ही विभाग ने इस संबंध में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग को भी अपने इस फैसले से अवगत कराया था। लेकिन टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने नियमों में बदलाव नहीं किया और आज भी यहां पर शर्त दो एकड़ जमीन की है। निजी स्कूल संचालक जब स्कूलों को अपग्रेड कराने के लिए शिक्षा विभाग के पास जाते हैं तो विभाग टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के पास भेज देता है। यहां पर दो एकड़ की शर्त के चलते महीनों तक फाइलें पड़ रहती हैं। इसके अलावा तमाम नियमों का हवाला देकर किसी की फाइल चलती है तो टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग अवसंरचना विस्तार शुल्क के नाम पर तीन लाख रुपये की फीस ली जाती है।
इस बारे में हरियाणा प्राइवेट स्कूल संघ के राज्य प्रधान सत्यवान कुंडू का कहना है कि दोनों विभागों में तालमेल नहीं होने के चलते निजी स्कूल संचालक परेशान हैं। इस संबंध में जल्द ही प्रतिनिधिमंडल शिक्षा मंत्री सीमा त्रिखा से मुलाकात करेगा।