पंजाब प्राइवेट सेल्फ फाइनेंस्ड डेंटल कॉलेज एसोसिएशन की ओर से दायर याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस राकेश कुमार जैन ने पंजाब मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च विभाग के सचिव और बाबा फरीद युनिवर्सिटी आफ हेल्थ साइंस के रजिस्ट्रार को नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई सात जुलाई को होगी।
याची की पैरवी कर रहे एडवोकेट मनीष कुमार सिंगला ने बुधवार को सुनवाई के दौरान अदालत को बताया कि पंजाब मेडिकल एजुकेशन विभाग की ओर से गत 18 मार्च को प्रदेश के मेडिकल और डेंटल संस्थानों में एमबीबीएस और बीडीएस कोर्सों के लिए नोटिफिकेशन जारी की गई है, लेकिन दाखिलों के मामले में बाबा फरीद यूनिवर्सिटी आफ हेल्थ साइंस की भूमिका पिछले कई सालों से निजी डेंटल कॉलेजों को परेशान करने वाली बनी हुई है।
याचिका में कहा गया है कि पिछले साल बाबा फरीद युनिवर्सिटी ने अंतिम क्षणों में निजी संस्थानों को ऐसी हालत में लाकर खड़ाकर दिया कि वे दाखिले नहीं सके। इतना ही नहीं, बाबा फरीद युनिवर्सिटी ने निजी संस्थानों के लिए जो दाखिले किए उनके लिए वसूली गई फीस की राशि भी कई महीनों तक निजी संस्थानों को नहीं दी। जबकि युनिवर्सिटी को विद्यार्थियों के दाखिले के एवज में ली गई फीस की अदायगी रोकने का कोई अधिकार नहीं था।
याचिका में कहा गया कि बाबा फरीद युनिवर्सिटी के इस कुंठित व्यवहार के कारण पिछले साल निजी डेंटल संस्थानों में कई सीटें खाली रह गईं। पिछले साल पंजाब के विद्यार्थियों ने पड़ोसी राज्यों में जाकर एडमिशन ले ली। याचिका में बताया गया है कि साल 2013 में 199 सीटें खाली रहीं।
जबकि साल 2014 में 455 सीटें और साल 2015 में 487 सीटें खाली रह गईं। इस पूरे हालात के बारे में डेंटल संस्थानों की ओर से सरकार के विभिन्न अधिकारियों के समक्ष रिप्रजेंटेशन भी दी गई, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। मामले में पंजाब मेडिकल एजुकेशन विभाग और बाबा फरीद युनिवर्सिटी की भूमिका गैरकानूनी, मनमानी और असंवैधानिक है, जिससे पंजाब में डेंटल संस्थानों को खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है।