भारतीय सेना में 13 साल रहने वाले किरपाल सिंह की मौत पाकिस्तान की कोट लखपत जेल में होगी, ये सोचा न होगा। गुरदासपुर के गांव मुस्तफाबाद सैंदा निवासी किरपाल सिंह 1991 में एकाएक घर से गायब हुआ और दोबारा लौटकर नहीं आया। भतीजे अश्वनी कुमार ने बताया कि उसके चाचा 13 साल तक सेना में रहे और घर आए फिर अकस्मात गायब हो गए। कुछ अर्से बाद उनका खत मिला था कि वह पाकिस्तान की जेल में है।
किरपाल को 1991 में पाकिस्तान के फैसलाबाद रेलवे स्टेशन पर हुए बम धमाके का आरोपी बनाया गया था। आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण परिवार उसकी रिहाई की पैरवी नहीं कर सका। पाक अदालत ने 20 मई 2002 को भारतीय कैदी किरपाल को पांच बार मौत की सजा, 60 साल की कैद और 27 लाख जुर्माना किया।
अश्वनी बताते हैं कि दो महीने पहले उन्होंने खत भेजा था और खुद को सही-सलामत बताया था लेकिन सोमवार की देर रात मीडिया से खबर मिली की उनकी जेल में मौत हो गई। उन लोगों को उम्मीद थी कि वह लौटेंगे मगर उनके मरने की खबर आई है। उधर सरबजीत की बहन दलबीर कौर किरपाल की बहन जागीर कौर को सांत्वना देने उनके घर भी पहुंची थी। दलबीर ने आरोप लगाया था कि पाकिस्तानी जेल में उनके भाई सरबजीत की तरह किरपाल सिंह की भी हत्या हुई है।