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मोदी बोले- ग्लोबल मार्केट को इंतजार, मेक इन इंडिया का सपना होगा साकार

Tue, 18 Oct 2016 08:51 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लुधियाना(पंजाब)
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पंजाब के लुधियाना में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज लुधियाना में एमएसएमई के विशेष कार्यक्रम में हिस्सा लिया और देश भर के 232 उद्यमियों को राष्ट्रीय अवार्ड से नवाजा। उन्होंने यहां एक कार्यक्रम में महिलाओं को सोलर चरखा प्रदान किया। प्रधानमंत्री ने उनके साथ चरखा भी चलाया। इस मौके पर पंजाब के राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर, केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र और उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल भी थे।कार्यक्रम से पहले मोदी ने खादी बोर्ड की एक प्रदर्शनी देखी।
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इसके बाद उन्होंने एमएसएमई की दो नई स्कीमें लांच की। प्रधानमंत्री ने रिमोट का बटन दबाकर एससी/एसटी हब का उद्घाटन भी किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि ग्लोबल मार्केट इंतजार कर रही है और हमें मेक इन इंडिया के सपने को साकार करना है। इसके लिए भारत के लघु उद्योगों का विदेशों में प्रसार होना चाहिए। ताकि दुनिया की मार्केट में भारत की पहचान बने। भारत के लघु उद्योगों का नाम हो। जापान को देखिए, वह लघु उद्योगों के बल पर ही दुनिया के बाजार में खड़ा है। मेड इन जापान, मेड इन चाइन सभी भागकर खरीदते हैं। अब हमें मेड इन इंडिया बनाना है, जिसे लोग आंखें बंद करके खरीदें।

मोदी ने कहा कि हमारी कोशिश है कि जीरो इफेक्ट जीरो डिफेक्ट मूवमेंट के लिए लघु उद्योग आगे आएं। मिलकर काम करते हुए एक कंपीटिशन का दौर शुरू कीजिए। दुनिया के बाजार में भारत के उद्योग खड़े हो जाएंगे। लेकिन इसके लिए पूरी तैयारी करनी होगी। अपना सर्वोतम देना होगा, नहीं तो अगर आपका माल दुनिया के बाजार में पहुंच रहा है तो कहीं न कहीं से आवाज उठेगी, भारत के माल का बहिष्कार करो। ऐसा न हो, इसके लिए जीरो इफेक्ट सुनिश्चित करना जरूरी है।
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ग्लोबल बाजार में भारत को पैठ बनानी है, लघु उद्योग आगे आएं

पंजाब के लुधियाना में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
मोदी ने कहा कि भारत लगातार विकास के पथ पर अग्रसर हो रहा है। देश न केवल खुद प्रगति कर रहा है, बल्कि दुनिया की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत बना रहा है। देश की अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और इसे इस मुकाम पर बनाए रखने के लिए ग्लोबल बाजार में पैठ बनानी जरूरी है। इसके लिए लघु उद्योगों को आगे आना होगा।

मोदी ने कहा कि सरकार ने एक फैसला लिया है। पहले भारत सरकार अवार्ड देती थी, जिन्हें आप घरों में सजाते थे। अब सरकार विधिवत रूप से इस बात की अनुमति देती है कि जो अवार्ड मिले हैं, जो लोगो मिला है, वो अब फैकट्री में कर्मचारियों के सीने पर लगा मिले। ताकि हर कोई उसे जाने और कर्मचारी शान से कहे कि मैं उस कंपनी में काम करता हूं। इस दिशा में काम किया जा रहा है।

मोदी ने कहा कि हिन्दुस्तान में बैंकों की सवा लाख ब्रांच हैं। हर बैंक की ब्रांच एक महिला, एक अनुसूचित जाति को एंटरप्रेन्योर बनाने में मदद करें। इसके लिए सरकार कदम उठा चुकी है। राज्य सरकारों से अनुरोध किया है कि दलित और आदिवासी निर्माण करेंगे। समाज के उन वर्गों को आर्थिक गतिविधि का केंद्र बनाना है ताकि देश आर्थिक उन्नति करे।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पंजाब गुरू गोबिंद सिंह जी की 350वीं जयंती मना रहा है। उन्होंने कहा था कि मनुष्य की एक ही जात है, न नीच न ऊंच। उन्होंने जात पात छूत अछूत के खिलाफ आवाज उठाई थी, लेकिन हम जानते हैं कि समाज में दलित भाइयों के साथ ऐसी घटनाएं होती हैं कि सिर शर्म से झुक जाता। 70 साल हो गए हैं, अब हमें अपनी सोच बदलनी पड़ेगी। व्यवहार बदलना पड़ेगा। सामाजिक रु​ढ़ियों से ऊपर उठकर भाग्य बदलना होगा।





 
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देश भर से आई 500 महिलाओें को सोलर चरखे बांटें

पंजाब के लुधियाना में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
एमएसएमई के राष्ट्रीय समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश भर से आई 500 महिलाओें को सोलर चरखे बांटें। इन्हें लुधियाना के औद्योगिक घराने जीएसएल लौटे ग्रुप ने बनाया और पेंटेंट करवाया है। 2022 तक ऐसे एक करोड़ सोलर चरखे पूरे देश में बांटने की योजना है। औद्योगिक शहर में अब इस सोलर चरखे की कास्टिंग को कम करने पर रिसर्च चल रही है।

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने चरखे के साथ सूत तैयार कर खादी को बढ़ावा देने के लिए जागरूक किया था। इसी परंपरा को अब आगे बढ़ाने का बीड़ा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उठाया है। महात्मा गांधी ने जो चरखा देश के हाथ सौंपा था, वह लकड़ी का बना था और हाथ से चलता था। वहीं मोदी जिस चरखे को देश की ग्रामीण महिलाओं को सौंपना चाहते हैं, वह हाईटेक है। सौर ऊर्जा से चलता है।

उत्पादन भी पारंपरिक चरखे (दो सौ ग्राम रोजाना) के मुकाबले ज्यादा (चार किलो धागा) तैयार कर सकता है। 16 स्पिंडल का यह चरखा तीस से पचास काउंट का धागा तैयार कर सकता है। इसके साथ 250 से 300 रुपये तक रोजाना कमाए जा सकते हैं। कंपनी के एमडी घनश्याम लौटे ने कहा कि उन्हें चरखे को विकसित करने के निर्देश मिनिस्ट्री ऑफ टेक्सटाइल से मिले हैं।

लोटे ने कहा कि हाईटेक चरखा सौर ऊर्जा से करीब आठ घंटे तक चलेगा। जबकि इस पर लगी बैटरी और इनवर्टर के जरिए यह चार घंटे ज्यादा चल सकता हैं। इस पर बिजली और मोबाइल चार्जर के लिए प्वाइंट भी दिए गए हैं। इसके साथ आधा हार्स पावर की मोटर लगी है जो 600 वाट सोलर पैनल से चलेगी।
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