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हरियाणा में मेयर और नगर परिषद अध्यक्ष के खिलाफ फिर ला सकेंगे अविश्वास प्रस्ताव

Thu, 05 Nov 2020 06:18 PM IST
ajay kumar प्रवीण पाण्डेय, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

  • विधानसभा सत्र में संशोधन विधेयक पारित कराएगी सरकार, निकाय एक्ट में जुड़ेगा क्लॉज
  • पूर्व सरकार में कानून से हटा दिया गया था क्लॉज, मेयर, नप अध्यक्षों की बढ़ेगी बेचैनी
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फाइल फोटो।
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विस्तार
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हरियाणा के शहरी निकायों के कानून में बड़ा परिवर्तन करने की तैयारी है। नगर निगमों के मेयर व नगर परिषद अध्यक्षों के खिलाफ सदस्य फिर से अविश्वास प्रस्ताव ला सकेंगे। पूर्व सरकार में निकायों के कानून से इस क्लॉज को हटा दिया गया था। अब सरकार इस क्लॉज को दोबारा कानून में जोड़ने के लिए संशोधन विधेयक ला रही है। गुरुवार से शुरू हो रहे विधानसभा सत्र में इस संशोधन विधेयक को सरकार पारित कराएगी। अविश्वास प्रस्ताव ला सकने का क्लॉज कानून में जुड़ने से मेयर व नगर परिषद अध्यक्षों की बेचैनी बढ़ना लाजिमी है।

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पूर्व भाजपा सरकार ने मेयर के सीधे चुनाव कराने की शुरुआत की है। भाजपा सरकार के कार्यकाल में जितने भी नगर निगमों के चुनाव हुए, उनमें मेयर को सीधे जनता ने ही चुना। पार्षदों के हाथ में चुनने व अविश्वास प्रस्ताव लाने की शक्ति नहीं थी। जिससे मेयर बेखौफ होकर काम करने लगे कि उन्हें कोई नहीं हटा सकता। मेयर की कार्यप्रणाली को लेकर सरकार के पास अनेक शिकायतें भी पहुंची हैं। 

शिकायतें आने पर शहरी निकाय मंत्री अनिल विज ने कानून का अध्ययन करवाया तो ज्ञात हुआ कि अविश्वास प्रस्ताव लाने का क्लॉज ही गायब है। कुछ मेयर की शिकायतें विज को सीधे भी मिली हैं, जिसमें राजस्व वसूली व रिकवरी न करने के मामले प्रमुख हैं। मेयर कोविड का बहाना बनाकर रिकवरी व राजस्व वसूली को लेकर प्रभावी कदम उठा ही नहीं रहे। इससे विज भी नाखुश हैं।
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आधे पार्षद ला सकेंगे प्रस्ताव, दो तिहाई बहुमत पर जाएगी कुर्सी
मेयर या नगर परिषद अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव सदस्य एकजुट होकर ला सकेंगे। मसलन अगर कुल 20 सदस्य नगर निगम या परिषद में हैं तो उनमें से दस एक साथ आकर अविश्वास प्रस्ताव ला सकेंगे। अगर 15 एकजुट होकर खिलाफ वोट करते हैं तो मेयर एवं नगर परिषद अध्यक्ष को हटाया जा सकेगा।

विधायक के बराबर समझ रहे मेयर
वर्तमान में मेयर अपने आप को विधायक से बढ़ कर समझने लगे हैं। सीधे चुनाव होने के कारण उन्हें लगने लगा है कि उनका जनाधार कही से भी विधायक से कम नहीं है। ऐसे में कई स्थानों पर विधायकों ने सरकार से संबंधित मेयर की शिकायत भी की है। साथ ही यह मुद्दा भी उठाया है कि मेयर बनने के बाद वे अपने आप को टिकट की दौड़ में भी शामिल कर रहे हैं।

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