राज्य मंत्रिमंडल ने सोमवार को कर्फ्यू व लॉकडाउन के कारण राज्य की आबकारी नीति में उचित बदलाव करने के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत किया था। सरकारी प्रवक्ता ने बुधवार को बताया कि मुख्यमंत्री ने वित्त विभाग की सलाह के अनुसार आबकारी विभाग की सिफारिशों को मंजूर कर लिया है। कैप्टन ने मार्च में लॉकडाउन के दौरान 9 दिनों के दौरान हुए घाटे के लिए एमजीक्यू (मिनिमम गारंटेड क्वांटिटी) के अनुपात के अनुसार राहत देने की वित्त विभाग की सिफारिशों को भी मंजूरी दे दी है।
फिर से तय हो सकती है लाइसेंस फीस
वित्त विभाग की सिफारिशों के मुताबिक, एक अप्रैल से 6 मई तक घाटे की अवधि के लिए राजस्व, लाइसेंस फीस और एमजीआर, दोनों को आबकारी विभाग द्वारा फिर से निर्धारित किया जा सकता है। गौरतलब है कि साल 2019-20 के लाइसेंसधारी भी 31 मार्च, 2020 तक अपना साल मुकम्मल नहीं कर सके थे, क्योंकि 23 मार्च, 2020 को कर्फ्यू और लॉकडाउन लागू हो जाने के कारण 9 दिन ठेके बंद रहे थे। इस तरह साल 2020-21 के लिए शराब के ठेके, जोकि आबकारी नीति के मुताबिक एक अप्रैल, 2020 को खुलने थे, खोले नहीं जा सके।
मंत्री समूह करेगा वित्त विभाग के प्रस्ताव पर विचार
मुख्यमंत्री ने वित्त विभाग के प्रस्ताव पर विचार करने के लिए मंत्री समूह का गठन किया है, जो भविष्य में लॉकडाउन बढ़ने की सूरत में किसी किस्म की व्यवस्था करने या लाइसेंसधारकों को आने वाली समस्या पर विचार करेगा। मंत्री समूह में वित्त मंत्री, शिक्षा मंत्री और आवास एवं शहरी विकास मंत्री शामिल हैं।
शराब की घरों तक सप्लाई के मुद्दे पर कैप्टन ने फैसला किया है कि आबकारी नीति में पहले से मौजूद उपबंध लागू रहेंगे लेकिन इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट की राय का हवाला देते हुए होम डिलीवरी के विकल्प को लाइसेंसधारकों पर छोड़ दिया गया है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने शराब की होम डिलीवरी का सुझाव दिया था जिससे सामाजिक दूरी को बहाल रखा जा सके।
साल 2020-21 के लिए बाकी ठेकों की नीलामी का आदेश
लॉकडाउन के कारण आबकारी विभाग द्वारा साल 2020-21 के लिए ठेके की मुकम्मल अलॉटमेंट नहीं की जा सकी, जिस पर मुख्यमंत्री ने विभाग को 2020-21 की आबकारी नीति के अनुसार बाकी बचे ठेकों की नीलामी करने के निर्देश दिए हैं।
कुल 756 ग्रुपों में से 500 को 2019-20 की नीति के अनुसार नवीनीकृत किया गया था, जबकि बाकी बचते 256 ग्रुपों को पुनर्गठित कर दिया गया था। इनमें से 89 ग्रुपों की अलॉटमेंट 2020-21 की नीति के अनुसार कर दी गई थी। बाकी बचते 97 ग्रुपों की अलॉटमेंट की जानी अभी बाकी है।