पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर 27 सितंबर को गुप्त रूप से विश्वास मत को बिना किसी नियम का हवाला दिए और 21 सितंबर को पंजाब के राज्यपाल द्वारा पहले से जारी विशेष सलाह की पूरी तरह अवहेलना करते हुए लाए जाने के विरोध में स्पीकर कुलतार सिंह संधवां को मुख्यमंत्री भगवंत मान के आचरण के खिलाफ सदन में पेश करने के लिए निंदा प्रस्ताव भेजा है।
स्पीकर को लिखे पत्र में बाजवा ने कहा कि वह पंजाब विधानसभा में प्रक्रिया और कार्य संचालन के नियम 71 के तहत, मुख्यमंत्री भगवंत मान जोकि सदन के नेता भी हैं, के 27 सितंबर को सदन में उनके आचरण के खिलाफ निंदा प्रस्ताव भेज रहे हैं। चूंकि नियम 71 के तहत कम से कम सात स्पष्ट दिन के नोटिस की आवश्यकता को पूरा करना संभव नहीं है, मैं इस नियम के तहत समय सीमा में छूट के लिए भी अनुरोध करता हूं।
बाजवा ने निंदा प्रस्ताव में खासतौर पर यह बात कही है कि सरकार ने सदन के समक्ष सूचीबद्ध कार्यों का विवरण रखते हुए बताया था कि राज्य सरकार विधायी विचार के लिए जीएसटी, पराली जलाने, बिजली परिदृश्य आदि के मुद्दों को शामिल करेगी। राज्य सरकार ने इन्हीं कार्यों की जानकारी राज्यपाल को भी दी थी। इनके आधार पर सत्र बुलाए जाने की अनुमति मिली है लेकिन इन्हें दरकिनार करते हुए मुख्यमंत्री ने गुप्त तरीके से विश्वास प्रस्ताव पेश कर दिया।
बाजवा का कहना है कि इस प्रकार, मुख्यमंत्री का आचरण सत्र बुलाने के लिए राज्यपाल की सहमति में हेरफेर करने और सदन में इसके विपरीत विश्वास प्रस्ताव लाने के लिए सदन द्वारा निंदा का पात्र है। राज्यपाल के विश्वास के साथ विश्वासघात किया गया है। मुख्यमंत्री ने सदन में विपक्ष के सदस्यों और पंजाब के लोगों का भी अपमान किया है।