बाजवा ने कहा कि अगर किसानों की सरकार के साथ बातचीत सफल न हुई तो इसमें किसानों का दोष नहीं है। बाजवा ने कहा कि चीनी मिलें इस बार दिसंबर में भी चालू नहीं हुई है, जिससे गन्ना किसानों की मुश्किलें बढ़ गईं हैं। उन्होंने कहा कि पिछले साल तक यही चीनी मिलें अक्तूबर-नवंबर के दौरान गन्ने की पिराई का काम शुरू कर लेती थी।
35 रुपये का भुगतान सरकार अपनी तरफ से करे
बाजवा ने मांग की कि निजी चीनी मिल मालिक 35 रुपये कम कीमत पर गन्ना खरीदना चाहते हैं। ऐसे में किसानों को इस 35 रुपये प्रति क्विंटल राशि का भुगतान सरकार अपनी तरफ से करे। उल्लेखनीय है कि इन दिनों पंजाब के गन्ना किसान पिछले साल बेचे गन्ने का पैसा लेने के लिए निजी चीनी मिलों के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं। किसानों को पिछला बकाया नहीं मिला है, वहीं उन्हें इस साल खेतों में खड़ी गन्ने की फसल बेचने में भी मुश्किल आ रही है।
बाजवा ने कहा कि दस साल के अंतराल के बाद कांग्रेस बहुमत के साथ सत्ता में लौटी है, जिसके चलते लोगों से किए वादे सरकार को पूरे करने चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से अपील की कि गन्ना किसानों का मामला तुरंत हल करें।