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प्रताप सिंह बाजवा का कैप्टन पर फिर हमला, ट्वीट कर कहा- सीएम की छत्रछाया में पल रहे माफिया

Fri, 22 May 2020 01:32 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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प्रताप सिंह बाजवा और कैप्टन अमरिंदर सिंह - फोटो : फाइल फोटो
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आबकारी नीति, मुख्य सचिव-मंत्रियों के बीच विवाद और चन्नी-बाजवा विवाद को लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह इन दिनों डैमेज कंट्रोल में जुटे हुए हैं लेकिन अपनी ही पार्टी के नेताओं के लगातार हमले थम नहीं रहे हैं। कैप्टन द्वारा नाराज मंत्रियों को लंच पर बुलाने के अगले ही दिन राज्य सभा सदस्य प्रताप सिंह बाजवा ने ट्वीट कर कैप्टन पर निशाना साधा है।

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बाजवा ने ट्वीट से एक साथ कई सवाल खड़े करते हुए कैप्टन से जानना चाहा है कि आखिरकार सूबे का खजाना खाली क्यों हो गया? उन्होंने आरोप लगाया कि जिस तरह अकाली दल की सरकार के समय माइनिंग माफिया बेखौफ तरीके से सक्रिय थे, उसी तरह मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की छत्रछाया में आज शराब, ट्रांसपोर्ट, केबल और माइनिंग माफिया खुल कर काम कर रहे हैं। 


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पत्रकारों से बातचीत में बाजवा ने कैप्टन से सवाल किया कि आखिरकार आबकारी विभाग लगातार घाटे में कैसे जा रहा है? बाजवा ने कहा कि इस बारे में उन्हें हर महीने की डिटेल भेजी गई है लेकिन मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि आबकारी विभाग घाटे में नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि राजा वड़िंग ने फिर से मनप्रीत बादल को ट्वीट करके पूछा है कि वे साफ करें कि एक्साइज विभाग घाटे में है या नहीं? और प्रदेश के खजाने को अब तक कितना नुकसान हुआ है? बाजवा ने सवाल उठाया कि पंजाब की डिस्टलरियों के मालिकों से साठगांठ करके शराब माफिया लगातार गुजरात में शराब की सप्लाई कर रहे हैं। इतनी बड़ी गड़बड़ी किसी नेता के वरदहस्त के बिना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि कैप्टन को इसका जवाब देना चाहिए।

अवैध शराब बेचने वाले कांग्रेसियों पर कार्रवाई में विफल रहे कैप्टन : शिअद

शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह राज्य में अवैध शराब बेचने वाले कांग्रेसी नेताओं के कार्रवाई करने का अपना संवैधानिक कर्तव्य निभाने में विफल साबित हुए हैं। पार्टी ने वीरवार को पंजाब के राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर से अपील की कि वे मुख्यमंत्री को शराब तस्करों के नाम सार्वजनिक करने का निर्देश दें।

पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि मीडिया रिपोर्टों के अनुसार मुख्यमंत्री ने प्रदेश कांग्रेस प्रमुख समेत अकाली नेताओं से की मीटिंग के दौरान स्वीकार किया था कि उन्हें कांग्रेसी नेताओं के शराब तस्करी में शामिल होने की पूरी जानकारी थी। उन्होंने कहा कि इस तथ्य की पुष्टि कांग्रेसी मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने भी की थी, जिन्होंने कहा था कि उन्होंने मुख्यमंत्री को काली भेड़ों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा था। चीमा ने कहा कि कोई भी मुख्यमंत्री राज्य के हितों से खिलवाड़ नहीं कर सकता।

राज्य के संसाधनों की रक्षा करना और सरकारी खजाने को लूटने वालों के खिलाफ कार्रवाई करना कैप्टन  का कर्तव्य था। चीमा ने आरोप लगाया कि वरिष्ठ कांग्रेसी नेता शराब माफिया से  मिलकर तीन सालों के दौरान सरकारी खजाने को 5600 करोड़ रुपये का चूना लगा चुके हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को बताना चाहिए कि उन्हें कौन सी बात इस मामले में कार्रवाई करने से रोक रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या सिर्फ अपनी सरकार को गिरने से बचाने के लिए कांग्रेसी मंत्रियों एवं विधायकों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रहे?
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बिजली संशोधन बिल के खिलाफ प्रस्ताव लाए पंजाब सरकार

 आम आदमी पार्टी ने केंद्र सरकार द्वारा लाए जा रहे बिजली संशोधन बिल-2020 को पंजाब और पंजाबियों के हक पर सरेआम डाका करार देते हुए राज्य सरकार से मांग की है कि इस घातक बिल के विरोध में प्रस्ताव पारित करने के लिए पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जाए, क्योंकि इस बिल के प्रारूप पर टिप्पणी करने के लिए पंजाब के पास पांच जून तक की ही मोहलत है।

नेता प्रतिपक्ष हरपाल सिंह चीमा और उप नेता सरबजीत कौर माणूंके ने कहा कि संवैधानिक तौर पर संघीय ढांचे के अनुसार बिजली को समवर्ती सूची में रखा गया है, जिसके तहत बिजली से संबंधित राज्य और केंद्र दोनों सरकारें कानून बना सकतीं हैं। मोदी सरकार की तरफ से बिजली क्षेत्र में कारपोरेट घरानों का एकाधिकार स्थापित करने के मंसूबे से बिजली संशोधन बिल-2020 लाया जा रहा है, जिसके लागू होने के बाद पंजाब के हाथ कुछ भी नहीं बचेगा। बिजली संबंधी तमाम छोटे-बड़े फैसले केंद्र सरकार के हाथों में चले जाएंगे।

राज्य का 80-85 प्रतिशत बिजली उत्पादन प्राईवेट और नेशनल थर्मल पावर निगम के अधीन चला जाएगा। चीमा ने कहा कि ईसीई एक ही ताकत होगी, जो बिजली की बेच, खरीद और वितरण संबंधी इकरारनामों पर फैसले सिविल अदालतों की शक्तियों सहित सुनाएगी। यानि यह अथॉरिटी बिजली समझौतों की विशेष अदालत होगी। चीमा मुताबिक, कारपोरेट घराने इस अथॉरिटी के जरिये जनविरोधी और राज्य विरोधी फैसले जबरन लागू करवाएंगे, राज्य सरकार के पास किसी फैसले पर विचार करने की मांग का अधिकार भी नहीं होगा।
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