प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) के तहत चंडीगढ़ में पिछले चार साल में करोड़ों रुपये खर्चे गए, लेकिन नौकरी पाने वालों की संख्या काफी कम है। आंकड़ों के अनुसार चंडीगढ़ में पीएमकेवीवाई के तहत 14 हजार युवाओं ने ट्रेनिंग ली लेकिन नौकरी महज 2958 को ही मिली है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2016 से 11 नवंबर 2019 के बीच चंडीगढ़ में प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के लिए 16072 युवाओं ने नामांकन भरा। इनमें से 14 हजार युवाओं ने ट्रेनिंग ली। कुल 10356 युवाओं को सर्टिफिकेट प्रदान किए गए और 2958 युवा ही नौकरी पाने में सफल हुए।
नाम न छापने की शर्त पर चंडीगढ़ प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस योजना के शुरू के सालों की अपेक्षा अब नामांकन में भी कमी आई है। कोर्स पूरा करने के बाद भी प्लेसमेंट नहीं होने के पीछे का कारण उन्होंने छात्रों में जागरूकता और योग्यता की कमी बताया।
चंडीगढ़ में 15 केंद्रों पर पीएमकेवीवाई के तहत कोर्स कराए जाते हैं। इन केंद्रों पर हॉस्पिटैलिटी, टूरिज्म, टेक्सटाइल्स, रिटेल, एंटरटेनमेंट तथा मीडिया, आईटी, फर्नीचर तथा फिटिंग, फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री, इलेक्ट्रॉनिक्स, सुंदरता तथा वैलनेस, परिधान कोर्स व अन्य में सर्टिफि केट कोर्स कराए जाते हैं।
हरियाणा में 1,29,259 और पंजाब में 78,465 युवाओं को नौकरी
आंकड़ों के अनुसार पिछले चार साल में हरियाणा में प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत 4 लाख 24 हजार 71 युवाओं ने ट्रेनिंग ली, जिसमें से एक लाख 29 हजार 259 युवाओं को नौकरी मिली। वहीं, पंजाब में 2 लाख 30 हजार 17 युवाओं ने ट्रेनिंग ली और 78 हजार 465 को नौकरी मिली। इस योजना के तहत केंद्र सरकार की तरफ से पिछले चार साल में हरियाणा के लिए 21 करोड़ 56 लाख 99 हजार 375 रुपये जारी किए गए हैं। वहीं, पंजाब के लिए 26 करोड़ 39 लाख 52 हजार रुपये जारी किए गए हैं।
क्या है पीएमकेवीवाई?
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) को जुलाई 2015 में शुरू किया गया था। इस योजना के तहत 2020 तक एक करोड़ युवाओं को ट्रेनिंग देने की योजना बनाई गई थी। पीएमकेवीवाई में तीन महीने, छह महीने और एक साल के लिए रजिस्ट्रेशन होता है। कोर्स पूरा करने के बाद सर्टिफिकेट दिया जाता है। यह सर्टिफिकेट पूरे देश में मान्य होता है। इसके अलावा कोर्स कराने वाले केंद्र स्टूडेंट्स के लिए कंपनियों में इंटरव्यू भी आयोजित कराते हैं, ताकि इन्हें रोजगार मिल सके। इस योजना का उद्देश्य ऐसे लोगों को रोजगार मुहैया कराना है, जो कम पढ़े-लिखे हैं या बीच में स्कूल छोड़ देते हैं।