हरियाणा सरकार ने आखिर कोरोना को मात देने में जुटे विभिन्न विभागों के कर्मचारियों की सुध ले ली है। फील्ड में काम कर रहे स्वास्थ्य समेत अन्य विभागों के अधिकारियों, कर्मचारियों को भी पीपीई किट मिलेंगी। कंटेनमेंट जोन में कार्यरत कर्मचारियों को ही ये किट दी जाएंगी। हर कर्मचारी को किट के अलावा मास्क, सैनिटाइजर व साबुन भी दिया जाएगा।
नॉन कंटेनमेंट एरिया में कार्यरत कर्मचारियों को मास्क, सैनिटाइजर व साबुन मुहैया कराए जाएंगे। एनएचएम के मिशन निदेशक ने सभी सिविल सर्जन को निर्देश जारी कर दिए हैं। सर्व कर्मचारी संघ इस मांग को लगातार उठाता आ रहा था। सिविल सर्जन को भेजे पत्र में कहा गया है कि जिला प्रशासन ने कोरोना के फैलाव को रोकने के लिए अनेक टीमें बनाई हैं। जिनमें स्वास्थ्य के अलावा अन्य विभागों के कर्मचारी भी शामिल हैं।
ये टीमें कोरोना संक्रमितों व गैर संक्रमितों के सीधे संपर्क में आ रही हैं। इसलिए इनकी सुरक्षा भी बेहद जरूरी है। इसे देखते हुए टीमों में शामिल सभी कर्मचारियों आशा वर्कर्स, आंगनबाड़ी वर्कर्स, बहुद्देश्यीय स्वास्थ्य कर्मियों, एलएचवी इत्यादि को सुरक्षा उपकरण मुहैया कराए जाएं ताकि ये मरीजों के संपर्क में आने के बावजूद संक्रमण से बचे रहें।
फील्ड में काम कर रही टीमों में शामिल कर्मचारियों को प्रशिक्षित भी किया गया है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से उन्हें सैनिटाइज करने, बार-बार साबुन से हाथ धोने व सामाजिक दूरी की हिदायतें भी दी गई हैं। बावजूद इसके सरकार ने निर्णय लिया है कि संक्रमण वाले क्षेत्रों में कार्यरत कर्मियों को पीपीई किट व अन्य सुरक्षा उपकरण मुहैया कराने की भी जरूरत है। इसलिए निर्देशों पर अमल करते हुए सुरक्षा उपकरण मुहैया कराकर 23 अप्रैल तक रिपोर्ट मुख्यालय को भेजना सुनिश्चित करें।
प्रदेश में बढ़ती मास्क की जरूरतों को देखते हुए अब राजकीय आईटीआई में भी मास्क तैयार किए जाएंगे। बैठक में कौशल विकास एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग के महानिदेशक राकेश गुप्ता ने बताया कि राज्य में 172 राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान हैं, जिनमें से लगभग 90 संस्थानों में परिधान क्षेत्र से संबंधित ट्रेड चलाए जा रहे हैं।
इन संस्थानों में एक वर्षीय अवधि के इन ट्रेड में हर वर्ष लगभग 3100 प्रशिक्षु दाखिला लेते हैं और पाठ्यक्रम के पूरा होने के उपरांत उम्मीदवारों को परिधान क्षेत्र के प्रतिष्ठानों में आसानी ने नौकरी मिल जाती है या वे स्वरोजगार शुरू कर लेते हैं। उन्होंने कहा कि कोविड-19 वायरस के फैलने के कारण मास्क की मांग अचानक बढ़ गई है।
बाजार में उपलब्ध सर्जिकल मास्क बहुत महंगे हैं और एक समय के उपयोग के लिए हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा सर्जिकल मास्क का उपयोग मरीजों द्वारा करने और एक स्वस्थ व्यक्ति को संक्रमण से बचने के लिए सामान्य सूती कपड़े का मास्क पहनने की हिदायत दी गई है।
इसीलिए विभाग ने राजकीय आईटीआई में बड़े पैमाने पर मास्क तैयार और मास्क तैयार करने वाली स्वयं सहायता समूहों को भी अपनी मशीनें देने का निर्णय लिया। स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों ने अपने स्तर पर भी मास्क तैयार करना शुरु कर दिया और राज्य में विभिन्न जिलों में विभिन्न स्वयं सहायता समूहों द्वारा अब तक 11.50 लाख से अधिक मास्क तैयार किये जा चुके हैं।