पंजाब-हरियाणा से मांगी थी मदद लेकिन नहीं मिली
बिजली संकट से उबरने के लिए प्रशासन ने पंजाब और हरियाणा से प्रशिक्षित कर्मचारियों की मांग की थी। पंजाब ने मदद करने में असमर्थता जाहिर कर दी, जबकि हरियाणा की तरफ से प्रशासन को कोई जवाब नहीं मिला है।
मोबाइल नेटवर्क कनेक्टिविटी भी प्रभावित
चंडीगढ़ के बिजली विभाग में कर्मचारी संघ की हड़ताल के कारण शहर के कुछ हिस्सों में बिजली गुल हो गई है। इसने दूरसंचार टावरों को प्रभावित किया है, जिससे प्रभावित क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क कनेक्टिविटी में बाधा आ रही है। टेलीकॉम ऑपरेटर और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदाता कुछ क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति के अभाव में वैकल्पिक स्रोतों की बैटरी, डीजी, सोलर पैनल आदि का उपयोग कर अपनी साइटों, एक्सचेंजों आदि को बिजली प्रदान कर रहे हैं। लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. एसपी कोचर, डीजी, सीओएआई
अगले छह माह हड़ताल नहीं कर सकेंगे बिजली कर्मचारी
बिजली कर्मचारियों की हड़ताल को जबरन खत्म कराने के लिए प्रशासन ने चंडीगढ़ में छह महीने के लिए आवश्यक सेवा अनुरक्षण कानून (एस्मा) लगा दिया है। प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल ने इस संबंध में आदेश जारी किया। आदेश में लिखा कि जनहित में हड़ताल पर प्रतिबंध लगाना जरूरी है।
उधर, बिजली कर्मचारियों की हड़ताल की जानकारी होते हुए भी वैकल्पिक व्यवस्था करने में नाकाम रहा चंडीगढ़ प्रशासन मंगलवार देर शाम हरकत में आया। इसकी वजह भी हाईकोर्ट का हड़ताल को लेकर लिया गया स्वत: संज्ञान रहा। प्रशासन ने पूर्वी पंजाब के आवश्यक सेवा अनुरक्षण कानून (एस्मा) 1968 के उप धारा-3 के तहत इंजीनियरिंग विभाग के इलेक्ट्रिसिटी विंग के कर्मचारियों के अगले छह माह तक हड़ताल करने पर पूरी तरह रोक लगा दी है।
प्रशासन के गृह विभाग की ओर से सलाहकार धर्मपाल ने देर शाम एक आदेश जारी किया। इसमें कहा गया कि बिजली विभाग की हड़ताल से वितरण, हस्तांतरण (ट्रांसमिशन), संचालन और रखरखाव पर असर पड़ा है। बिजली एक अनिवार्य सेवा है, लिहाजा लोगों को इससे परेशानियां झेलनी पड़ी हैं, इसलिए हड़ताल पर रोक जरूरी है और ये जनहित में है। अगले छह माह तक बिजली विभाग के कर्मचारी कोई हड़ताल नहीं कर सकते।