अब जब धान के सीजन में किसानों को बिजली की सबसे ज्यादा जरूरत है तो तलवंडी साबो प्राइवेट थर्मल प्लांट के दोनों यूनिट बंद पड़े हैं। इस प्लांट का 660 मेगावाट का पहला यूनिट 8 मार्च को, जबकि दूसरा यूनिट 25 जून को बंद किया गया है। इस समय पंजाब में बिजली प्राप्ति के लिए 97 प्रतिशत निर्भरता प्राइवेट थर्मल प्लांटों पर है, केवल 3 प्रतिशत ही बिजली सरकारी प्लांटों से प्राप्त की जा रही है लेकिन इस 3 प्रतिशत बिजली के लिए भी सरकारी थर्मल प्लांट प्राइवेट थर्मल प्लांटों की अपेक्षा कहीं अधिक कारगर सिद्ध हो रहे हैं।
किसानों को मुफ्त बिजली के वादे से मुकर गई सरकार : सुखबीर
शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के अध्यक्ष सुखबीर बादल ने कहा है कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह अब पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल द्वारा किसानों को प्रदान की गई मुफ्त बिजली सुविधा देने के वादे से मुकर गए हैं। मुख्यमंत्री ने खेती कर्जमाफी लागू करने से इनकार कर किसानों को धोखा दिया है और अब मुफ्त बिजली से मुकर गए है। किसानों को धान उगाने में सबसे ज्यादा बिजली की जरूरत होती है। किसानों को आठ घंटे लगातार बिजली की सप्लाई के बजाय तीन से चार घंटे दी जा रही है।
सुखबीर बादल ने कहा कि पंजाब में खेती और घरेलू दोनों क्षेत्रों के लिए बिजली सप्लाई बहाल करने की मांग को लेकर शुक्रवार को शिअद के नेता पीएसपीसीएल कार्यालयों के बाहर विरोध प्रदर्शन करेंगे। हम यह भी मांग करते हैं कि सरकार किसानों को उनकी धान की फसल उगाने के लिए खर्च होने वाली अतिरिक्त लागत के लिए 50 रुपये प्रति क्विंटल बोनस का भुगतान करे।
बिजली की इमरजेंसी, कैप्टन सरकार आईसीयू में: मजीठिया
बिक्रम सिंह मजीठिया ने कहा कि पंजाब में इन दिनों बिजली इमरजेंसी के हालात हैं, जबकि कैप्टन सरकार आईसीयू में है। राज्य के किसान धान की बिजाई के लिए बिजली के लिए 42 डिग्री तापमान में सड़कों पर धरने देने को मजबूर हैं। दूसरी तरफ कैप्टन सरकार ने कोरोना काल से मंदी से जूझ रहे उद्योग को वित्तीय पैकेज देने के बजाय अगले दो दिन आपात छुट्टी पर रहने के आदेश जारी कर दिया है।