हरियाणा भीषण गर्मी के बीच बिजली संकट से जूझ रहा है। अडाणी और टाटा कंपनी से बिजली मिल नहीं रही। 1200 मेगावाट का खेदड़, हिसार पावर प्लांट भी कागजों में ही चल रहा है। इस कारण भीषण गर्मी में बिजली की मांग बढ़ने पर पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो पा रही। मांग 9000 मेगावाट से अधिक है जबकि बिजली विभाग लगभग 7600 मेगावाट बिजली आपूर्ति कर पा रहा है। मांग और आपूर्ति में 1400 मेगावाट से अधिक का अंतर आने की वजह से बिजली संकट लगातार गहराता जा रहा है।
1. एक साल से अधिक समय से अडाणी 1421 और टाटा 500 मेगावाट बिजली आपूर्ति नहीं कर रहे हैं। सरकार मोलभाव कर रही है। अभी तक बिजली की नई दरें दोनों कंपनियों के साथ तय नहीं हो पाई हैं। सरकार चाहती है कि अदाणी कंपनी स्थानीय कोयले से बनी बिजली 70 प्रतिशत और विदेशी कोयले से बनी 30 प्रतिशत बिजली हरियाणा को दे। अदाणी कंपनी इस बात पर अड़ी है कि वह 70 प्रतिशत बिजली, विदेशी कोयले से बनी हुई देगी। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने 15 मई तक 1000 मेगावाट बिजली मिलने का दावा शुक्रवार को दिल्ली में किया है। बिजली कहां से मिलेगी, इसे लेकर उन्होंने पत्ते नहीं खोले हैं।
बिजली मंत्री रणजीत चौटाला का कहना है कि अडाणी और टाटा कंपनियों के अधिकारियों के साथ कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। बैठकें सकारात्मक रही हैं। पूरी उम्मीद है कि आगामी कुछ दिनों में अदाणी से बिजली मिलनी शुरू हो जाएगी। बिजली की व्यवस्था की जा रही है। मौजूदा समय में लोगों को निश्चित तौर पर बिजली कटों का सामना करना पड़ रहा है लेकिन यह केवल सप्ताह की समस्या है। इसके बाद प्रदेश में बिजली समस्या से निजात मिल जाएगी। रात के समय लोड बढ़ने के कारण बिजली के कट लगाने पड़ते हैं। अब दिल्ली की आबादी भी फरीदाबाद, गुरुग्राम, बहादुरगढ़ व सोनीपत आदि क्षेत्र में आ रही है जिससे प्रदेश में बिजली की खपत बढ़ गई है।