बिजली निगम की ओर से भेजा गया दो करोड़ से ज्यादा का बिल।
उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम का फिर से बड़ा कारनामा सामने आया। उन्होंने एक घरेलू उपभोक्ता के घर का हजारों, लाखों में नहीं, बल्कि 2 करोड़ 18 लाख रुपये का बिल भेज दिया।
जब बिल वितरण करने वाले कर्मचारी ने मकान मालिक के हाथों में बिल सौंपा तो भारी भरकम बिल पाकर वह हैरान रह गया और उसकी एक बार तो सांसें थम गईं। हालांकि इससे पहले भी निगम की ओर से डेढ़ करोड़ से ज्यादा का पिछला बिल उसे दिया जा चुका है, लेकिन उपभोक्ता की ओर से शिकायत करने के बाद भी बिल दुरुस्त करने को लेकर अभी तक जहमत तक नहीं उठाई गई है।
यूएचबीवीएन के तहत शहरी क्षेत्र में दो डिविजन बनाए हुए हैं। डिविजन वन के तहत रामनगर में मीना पत्नी राकेश कुमार के घर बिजली मीटर कनेक्शन (अकाउंट नंबर-9902160000) है। काफी समय से वे यहां पर रही है।
घोटाला
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मीना के पति राकेश ने बताया कि इसी साल मार्च में उनके घर का मीटर किसी ने चोरी कर लिया था। इसके लिए बाकायदा निगम को अवगत भी कराया था और चोरी की रिपोर्ट कटवाकर निगम की ओर से जो निर्धारित फीस बनती थी, वह भी जमा करवाई थी।
उन्होंने बताया कि इसके बाद निगम की ओर से उन्हें एक बार औसत आधार पर बिल भेजा, जिसका उसने भुगतान भी कर दिया था, लेकिन उसके बाद घर पर कोई बिल नहीं आया। कई बार यहां मीटर रीडर और निगम कर्मियों को भी इस बारे में अवगत कराते हुए समाधान की मांग की थी।
अब तीन दिन पहले उसके घर में बिल वितरण करने वाली कर्मचारी ने जो बिल उन्हें थमाया है, वह कोई मामूली या घर के लोड के हिसाब से नहीं, बल्कि भारी-भरकम 2 करोड़ 18 लाख 69 हजार 254 रुपये का बिल बनाकर भेजा है। उपभोक्ता मीना का कहना है कि इतना बिल देखकर एक बार तो परिवार और पड़ोस के लोग भी सहम गए। उन्होंने बताया कि इससे पहले भी निगम की ओर से एक बिल भेजा था, वह भी करीब एक करोड़ 26 लाख का था, लेकिन शिकायत के बाद भी आज तक बिल को ठीक करके नहीं भेजा गया है।
बिल की स्थिति
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बिजली उपभोक्ता मीना के बिल का अकाउंट नंबर-9902160000 है। इसमें 4 लाख 91 हजार 810 यूनिट दिखाई गई हैं और 2 करोड़ 18 लाख 69 हजार 254 रुपये के बिल की अदायगी के लिए पहले बिना सरचार्ज के लिए 28 अक्तूबर की तिथि अंकित की हुई है, लेकिन बिल तय तिथि के बाद मिलने के कारण उसे बढ़ाकर पैन से 9 नवंबर तक किया हुआ है। सरचार्ज के रूप में 6 लाख पैंतालीस हजार 192 रुपये दिया हुआ है।
अधिकारी बोले, नहीं है संज्ञान में
बिलों को वितरण करने से पहले उनकी जांच की जाती है, लेकिन यदि किसी गलती से बिल दो करोड़ रुपये से ज्यादा का उपभोक्ता को भेजा गया है तो वह उनके संज्ञान में नहीं है। फिर भी वे इस मामले की जांच कराएंगे और उपभोक्ता को परेशान नहीं होने दिया जाएगा। निगम की ओर से बेहतर सुविधाओं का प्रयास रहता है।
चंद्रप्रकाश, एसडीई, डिविजन सिटी-1