विशेषज्ञ का कहना है कि सेंसर ने तो सिर्फ पीएम 2.5 का आकलन किया। डंपिंग ग्राउंड में वोलेटाइल आर्गेनिक कंपाउंड (वीओसी) भी निकले हैं। वीओसी हवा में घुलने के साथ वायु में ही रासायनिक तत्वों के साथ क्रिया कर जहरीली गैसों की उत्पत्ति करते हैं। यह गैस न सिर्फ स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती है बल्कि पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचाती है। वीओसी से मुख्यता बेंजीन, टायलीन, जायलीन जैसी जहरीली गैसें उत्पन्न होती हैं। इन गैसों के स्तर का पता भी सेंसर एनालाइजर से लगाया जाता है। विशेषज्ञ इसका आकलन कर रहे हैं, जल्द ही इसके भी आंकड़े जारी किए जाएंगे।
मौसम का मिला साथ, वरना कई गुना बढ़ता प्रदूषण
गनीमत रही कि बीते बुधवार को हवा का बहाव तेज था। पश्चिमी विक्षोभ के निष्क्रिय होने से उस समय उत्तर-पश्चिम हवाएं काफी तेजी से चल रही थीं, जिससे प्रदूषण के कण बहते चले गए। यदि हवा की गति मंद होती तो प्रदूषण का स्तर कई गुना बढ़ जाता। जिस तरह हवाएं चल रही थीं, सिर्फ उसी दिशा में प्रदूषण रहा। आग इतनी भयानक थी कि दोपहर में ही शहर के एक हिस्से में अंधेरा छा गया था। सड़कों का ट्रैफिक डायवर्ट करना पड़ा था।
हमने पाया है कि डंपिंग ग्राउंड में आग लगने के बाद प्रदूषण के स्तर में तीन गुना बढ़ोतरी हुई है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खराब है। ये काफी महीन कण होते हैं, जो सांस लेने के साथ शरीर के अंदर प्रवेश कर जाते हैं। - रविंद्रा खैवाल, एडिशनल प्रोफेसर स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ पीजीआई।