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Chandigarh News: पराली जलाने पर सियासत, दिल्ली-पंजाब आमने-सामने

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-दिल्ली सरकार ने पंजाब में पराली जलने के मामलों को बताया प्रदूषण बढ़ने की वजह
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-पंजाब के नेताओं ने किया पलटवार- सूबे को बदनाम न करें
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पराली जलाने के मामलों पर अब सियासत शुरू हो गई है। दिल्ली सरकार जहां इसका ठीकरा पंजाब सरकार पर फोड़ रही है वहीं पंजाब के नेताओं ने भी इन आरोपों को जवाब देते हुए कहा कि इस मामले में दिल्ली के नेता पंजाब को बदनाम न करें।
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने मंगलवार को पंजाब में आप सरकार पर दिल्ली में प्रदूषण का स्तर बढ़ाने के लिए किसानों को पराली जलाने के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया था। उन्होंने पंजाब में पराली जलाने के कथित वीडियो भी दिखाए थे। सिरसा का कहना था कि पंजाब में किसानों को आप सरकार की ओर से खेतों में पराली जलाने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया था कि दिवाली की रात पराली जलाने की सबसे ज्यादा घटनाएं पंजाब में हुईं। सिरसा के बयान के बाद पराली पर सियासत गरमा गई है।
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पंजाब के किसानों को जिम्मेदार ठहराना गलत : डॉ. बलबीर सिंह
पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि दिल्ली के कुछ भाजपा नेता और मंत्री बढ़ते प्रदूषण स्तर के लिए पंजाब के किसानों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं जो कि पूरी तरह गलत है। पंजाब की ओर अंगुली उठाने से पहले उन्हें यह समझना चाहिए कि प्रदूषण किसी एक राज्य या एक समुदाय की समस्या नहीं है। यह एक राष्ट्रीय संकट है जिसके लिए सहयोग की आवश्यकता है, टकराव की नहीं। उन्होंने कहा कि अगर पंजाब के खेतों का धुआं पंजाब, निकटवर्ती चंडीगढ़ या अंबाला को प्रदूषित नहीं करता, तो यह अचानक दिल्ली को कैसे प्रदूषित करता है? मुख्य कारण वाहनों का निकास, औद्योगिक डिस्चार्ज और दिल्ली के अंदर ही निर्माण की धूल हैं। दिल्ली वाले देश को अन्न देने वाले पंजाब के किसानों को बदनाम करना बंद करें। उधर, कांग्रेस विधायक परगट सिंह ने कहा कि पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी ने एक अध्ययन किया था कि पंजाब से वायु प्रदूषण दिल्ली तक नहीं पहुंचता है। सीएम भगवंत मान को दिल्ली जाना चाहिए और प्रदूषण के मुद्दे पर वहां प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से पंजाब का पक्ष स्पष्ट करना चाहिए।
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