हरियाणा विधानसभा में जाट आरक्षण आंदोलन पर सियासत 14वीं विधानसभा के पहले सत्र में भी जारी रही। 2016 में हुए आंदोलन के जख्मों को भले ही प्रदेश की जनता भुलाना चाहे पर सियासतदान भूलने नहीं देते। 13वीं विधानसभा में जहां माननीयों ने जाट आंदोलन पर जमकर राजनीतिक रोटियां सेकी, वहीं नई सरकार में भी यह सिलसिला शुरू हो गया है। कांग्रेस और इनेलो, सरकार पर दबाव बनाकर युवाओं की सहानुभूति बटोरना चाहते हैं।
नई विधानसभा के पहले सत्र के दूसरे दिन कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक डॉ. रघुबीर कादियान तो तीसरे व अंतिम दिन इनेलो विधायक अभय सिंह चौटाला ने जेलों में बंद युवाओं को मुकद्मे वापस लेकर रिहा करने का मुद्दा जोरशोर से उठाया। कादियान तो यह कहने से भी नहीं चूके कि पूर्व वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु भी अब सदन में नहीं हैं। उनकी कोठी जलाने के आरोप में अनेक निर्दोषयुवा जेलों में बंद हैं, उनके केस वापस लेकर युवाओं की रिहाई सुनिश्चित कराई जाए।
उधर, अभय सिंह चौटाला बुधवार को जेल में बंद युवाओं का मुद्दा उठाया साथ ही सरकार की तरफ से जवाब की मांग की। स्पीकर ज्ञान चंद गुप्ता ने उन्हें यह कहकर चुप करा दिया कि उनकी तरफ से चर्चा के लिए कोई नोटिस नहीं आया है। इसलिए यह मुद्दा नहीं उठाया जा सकता। अभय चौटाला इस मुद्दे पर चर्चा कराने के लिए अड़े रहे। स्पीकर ने जब साफ मना कर दिया तो इनेलो विधायक चौटाला विरोध स्वरूप सदन से वाक आउट कर गए।
सदन में कादियान ने अभय की बात का समर्थन किया। भाजपा विधायकों ने इस अभय के मुद्दा उठाने के दौरान टोकाटोकी भी की।