उन्होंने कहा कि 2004 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश देकर कहा था कि यह थर्मल प्लांट बड़े स्तर पर प्रदूषण फैला रहे हैं, जिससे लोगों की जान को खतरा है, इसलिए यह प्लांट बंद होने चाहिए। 2015 में प्रदूषण का मुद्दा उठा था लेकिन बाद में प्रदूषण फैलने के पीछे पराली का धुआं बताकर इसका ठीकरा किसानों के सिर फोड़ दिया गया।
बिजली समझौतों पर संदेह है तो कांग्रेस कैंसिल कर दे: सुखबीर
उधर बठिंडा के गांव कोटशमीर में सुखबीर बादल ने प्रदेश सरकार पर पलटवार किया। बिजली समझौतों पर सुखबीर बादल ने कहा कि इस संबंध में जो भी एग्रीमेंट था वह पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार के समय तैयार किया गया था। इस बारे में कांग्रेस अपने बडे़ नेताओं से सीधे बात करे न कि शिअद के खिलाफ झूठी बयानबाजी करे। बादल ने कहा कि अगर कांग्रेस को बिजली एग्रीमेंट पर कोई संदेह है तो वो रद्द कर दे।
वहीं दिल्ली चुनाव के दौरान भाजपा के साथ पैदा हुए मतभेद पर सुखबीर ने कहा कि शिअद ने भाजपा के साथ बैठकर मतभेद दूर करने के बाद दिल्ली में भाजपा का समर्थन भी किया। एग्जिट पोल पर सुखबीर ने कहा कि कई बार एग्जिट पोल फेल हो जाते हैं। दो दिन बाद नतीजे आएंगे, उसका इंतजार करना चाहिए।
'ढींढसा की रैली से शिअद को कोई फर्क नहीं पड़ता'
सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि 23 फरवरी को सुखदेव सिंह ढींढसा की संगरूर में होने वाली रैली से अकाली दल को कोई फर्क नहीं पड़ता। रैली करना सभी का अधिकार है। कैप्टन सरकार को आडे़ हाथ लेते हुए सुखबीर बादल ने कहा कि यह सरकार जनता से झूठे वादे करके सत्ता में आई। उन्होंने कहा कि अकाली दल की सरकार के समय पंजाब में प्रति यूनिट पांच रुपये बिजली दी जा रही थी लेकिन कैप्टन सरकार ने बिजली दरें बढ़ाकर लोगों पर बोझ डाल दिया है।