पंजाब सरकार ने केंद्रीय एससी आयोग और राज्य एससी आयोग को जानकारी दिए बिना ही पीसीएस-जे (ज्यूडिशियल) परीक्षा में एससी वर्ग को केवल चार मौके देने का फैसला लागू कर दिया है, जबकि इस वर्ग के लिए अनगिनत मौकों का नियम लागू था। सरकार के इस फैसले से राजनीति गरमा गई है।
पंजाब एकता पार्टी के प्रधान सुखपाल सिंह खैरा ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के नाम पत्र लिखकर पीसीएसजे (ज्यूडिशियल) की परीक्षा में एससी वर्ग के विद्यार्थियों के अधिकारों का हनन बताया है। राज्य सरकार ने गुपचुप तरीके से निचले तबके के लिए बनी पॉलिसी में बड़ा बदलाव कर दिया है।
20 अक्तूबर 2009 में बने पंजाब स्टेट सिविल सर्विसेज नियम (अपाइंटमेंट बी कम्बाइंड कम्पीटेटिव एग्जाम) में बदलाव करके इसका नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया गया है, जिसका नियम नंबर पांच यह बताता है कि पीसीएस (ई) परीक्षा में बैठने के लिए प्रत्येक उम्मीदवार को केवल चार मौके दिए जाएंगे।
सीएम को लिखे पत्र में खैरा ने कहा है कि पूरा फैसला गैरकानूनी तरीके से नेशनल एससी कमीशन या पंजाब एससी कमीशन की सलाह के बिना किया गया है, जबकि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 338(9) के अनुसार, दलितों को प्रभावित करने वाले किसी भी बड़े बदलाव के लिए नेशनल कमीशन फॉर शेड्यूल कास्ट की सलाह लेना, केंद्र और राज्य सरकारों के लिए अनिवार्य है। खैरा ने मांग की है कि राज्य सरकार द्वारा एससी वर्ग के खिलाफ लिए गए उक्त फैसले को तुरंत वापस लिया जाए।