चंडीगढ़ मेयर चुनाव को लेकर सियासत गरमा गई है। आप और कांग्रेस गठबंधन में दरार दिखने लगी है, वहीं भारतीय जनता पार्टी सतर्क हो गई है। पार्टी न सिर्फ विपक्षी दलों की गतिविधियों पर नजर रखे हुए है, बल्कि अपने पार्षदों की भी लगातार निगरानी कर रही है, ताकि कोई भी पार्षद विपक्षी खेमे के संपर्क में आकर चुनावी गणित न बिगाड़ सके।
भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को हर पार्षद की स्थिति और मनोदशा की रिपोर्ट भेजी जा रही है। पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता व्यक्तिगत तौर पर पार्षदों से संवाद कर उनकी नब्ज टटोल रहे हैं। हालांकि फिलहाल भाजपा का कोई भी पार्षद पार्टी छोड़ता नजर नहीं आ रहा है, लेकिन विपक्षी दल लगातार सेंधमारी की कोशिशों में जुटे हैं। बीते दिनों आप की पार्षद सुमन और पूनम के भाजपा में शामिल होने के बाद सियासी हलचल और तेज हो गई है। इसी वजह से भाजपा किसी भी तरह की चूक से बचना चाहती है।
कांटे का है चुनाव
29 जनवरी को होने वाले मेयर चुनाव से पहले नगर निगम में राजनीतिक गतिविधियां चरम पर हैं। सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों खेमों में रणनीतिक बैठकों, जोड़-तोड़ और संभावित समीकरणों को लेकर लगातार मंथन हो रहा है। मौजूदा हालात को देखते हुए यह चुनाव पूरी तरह कांटे का माना जा रहा है, जहां एक-एक वोट निर्णायक हो सकता है। इसी राजनीतिक हलचल के बीच भाजपा चंडीगढ़ के प्रदेशाध्यक्ष जतिंदर पाल मल्होत्रा ने हाल ही में भाजपा के नव-नियुक्त राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन से भाजपा के मुख्य कार्यालय, नई दिल्ली में शिष्टाचार भेंट की।
इस मुलाकात को केवल औपचारिक नहीं, बल्कि मेयर चुनाव के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार बैठक में चंडीगढ़ के मौजूदा राजनीतिक हालात, संगठन की मजबूती और नगर निगम में पार्टी की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई। इससे साफ संकेत मिलते हैं कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व मेयर चुनाव को लेकर पूरी तरह गंभीर है और किसी भी तरह की ढिलाई के मूड में नहीं है।