पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दल वोटरों को रिझाने में जुटे हैं। इसके लिए तरीके भी काफी नए नए आजमाए जा रहे हैं। दलित, किसान, मुस्लिम, आतंकियों से सुरक्षा, नशा और भ्रष्टाचार मुक्त पंजाब जैसी बातों का सहारा लिया जा रहा है। प्रमुख राजनीतिक दलों के घोषणा पत्र के बाद भी वोटरों का कोई वर्ग अछूता न रह जाए, इसलिए इन मुद्दों के साथ प्रचार की भूमिका खास होगी।
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर ने दलितों के बराबर मुस्लिमों को हक देने की बात कहकर प्रदेश के मुस्लिमों को अपने पक्ष में करने का दांव चला है। भाजपा-शिअद गठबंधन, पंजाब को आतंकवाद मुक्त बनाने में सक्षम एकमात्र पार्टी और केंद्र में सत्ता होने का हवाला देते हुए वोटरों को अपने पक्ष में करने की हरसंभव कोशिश में जुटा है।
आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब से नशे का सफाया, भ्रष्टाचार मुक्त सरकार देने का वादा कर वोटरों को रिझाने में जुटी है। आप ने दलित कार्ड खेलते हुए उनके लिए अलग घोषणा पत्र जारी कर दिया, लेकिन विपक्ष लगातार अरविंद केजरीवाल पर निशाना साध रहा है। आप को दूसरे प्रदेश का बताते हुए पार्टी को सत्ता में आने देना नहीं चाहती है तो भाजपा-शिअद और कांग्रेस भी केजरीवाल को किसी भी फ्रंट पर आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश कर रही है।
डेरे का समर्थन होगा ट्रंप कार्ड
ram rahim singh
चुनाव के आखिरी दौर में डेरों पर भी राजनीतिक दलों की निगाहें टिकी हुई हैं। हरियाणा के सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा का समर्थन मिलने पर विधानसभा चुनाव का समीकरण आखिरी वक्त में बदल गया था। चुनाव से पहले भी 100 से अधिक प्रत्याशी डेरा सच्चा सौदा सहित पंजाब स्थित अन्य डेरों में जा चुके हैं ताकि वोटिंग के दौरान इसका फायदा मिल सके।
डेरा सच्चा सौदा से राजनीतिक दलों को काफी उम्मीदें हैं। डेरा ब्यास, डेरा सचखंड बल्लां सहित सैकड़ों डेरे हैं, जिनके अनुयायियों की संख्या लाखों में है। इनमें से किसी भी जाति विशेष के अनुयायियों की संख्या अधिक है, जिसे देखते हुए यह माना जा रहा है कि डेरों का समर्थन मिलने पर उस विशेष वर्ग के वोटरों का पार्टी को सीधा फायदा मिलेगा।
पंजाब में हैं 32 फीसदी दलित, करीब दो फीसदी मुस्लिम
पार्टियां अलग अलग कार्ड को अपने जीत का हथियार बना रही हैं। पार्टियां इन वर्ग के वोटरों को ध्यान में रखते हुए वादे कर रही हैं, ताकि चुनाव में इसका अधिक से अधिक फायदा मिल सके। मुस्लिमों की प्रतिशतता करीब दो फीसदी है, लेकिन उनके ध्रुवीकरण से पार्टी विशेष को ही फायदा मिलने की उम्मीद है।