पंजाब में एक जून को होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए पार्टियों ने अलग ही रणनीति अपनाई है। पार्टियों ने कई दिग्गजों को मैदान में उतार दिया है। इस बार पांच मौजूदा कैबिनेट मंत्रियों के अलावा पूर्व सीएम व डिप्टी सीएम, 18 पूर्व और मौजूदा विधायक, पूर्व व मौजूदा सांसदों के अलावा पंजाबी कलाकार व गायक भाग्य आजमाने जा रहे हैं। इनके अलावा ब्यूरोक्रेट्स भी चुनाव मैदान में ताल ठोक रहे हैं। इससे पंजाब में कई सीटों पर कांटे की टक्कर होने की संभावना है।
सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी ने किसी नए उम्मीदवार पर दांव न खेलते हुए अपने ही पांच कैबिनेट मंत्रियों गुरमीत सिंह मीत हेयर को संगरूर से, सेहत मंत्री डॉ. बलबीर सिंह को पटियाला से, लालजीत सिंह भुल्लर को खडूर साहिब से, कुलदीप सिंह धालीवाल को अमृतसर और गुरमीत सिंह खुड्डियां को बठिंडा सीट से चुनाव मैदान में उतार दिया है। वहीं मुक्तसर से विधायक जगदीप सिंह काका बराड़ को फिरोजपुर, बटाला के विधायक अमनशेर सिंह शैरी कलसी को गुरदासपुर और लुधियाना (सेंट्रल) से विधायक अशोक पराशर पप्पी को लुधियाना हलके से टिकट दी है।
पंजाब विधानसभा में विरोधी दल कांग्रेस के ही डिप्टी लीडर डॉ. राजकुमार चब्बेवाल के हाथों में झाड़ू थमाकर उन्हें भी होशियारपुर से अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। कांग्रेस के बस्सी पठाना के विधायक रहे गुरप्रीत सिंह जीपी को फतेहगढ़ से आप ने टिकट दी है।
कलाकार व ब्यूरोक्रेट्स भी ठोक रहे ताल
मुख्यमंत्री भगवंत मान के करीबी माने जाने वाले पंजाबी कलाकार कर्मजीत अनमोल को फरीदकोट (रिजर्व) से और वहीं भाजपा की तरफ से पंजाबी गायक हंसराज हंस को भी इसी सीट से टिकट देकर मैदान में उतारा गया कहै। अपनी कला के कारण पंजाबियों में अच्छा प्रभाव रखने के कारण इन दोनों के फरीदकोट से ताल ठोकने के कारण मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है।
वहीं भाजपा ने पूर्व राजदूत तरणजीत सिंह संधू को अमृतसर से और बादल परिवार का गढ़ माने जाने वाली बठिंडा सीट से आईएएस अधिकारी परमपाल कौर सिद्धू को मैदान में उतारा है। संधू यूएस में भारतीय राजदूत रहे हैं। वहीं, परमपाल कौर सिद्धू वरिष्ठ अकाली नेता सिकंदर सिंह मलूका की बहू हैं और 2011 बैच की आईएएस अधिकारी हैं।
बठिंडा से अकाली दल की तरफ से खुद प्रधान सुखबीर सिंह बादल की पत्नी मौजूदा सांसद हरसिमरत कौर बादल उम्मीदवार हैं। उधर, आप की तरफ से गुरमीत सिंह खुड्डियां व कांग्रेस से पूर्व विधायक जीत मोहिंदर सिंह सिद्धू अपनी-अपनी दावेदारी ठोक रहे हैं। इससे बठिंडा सीट भी काफी हॉट बनी हुई है।
इन पर रहेगी सबकी नजर
कांग्रेस ने जालंधर (रिजर्व) से पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी, गुरदासपुर से पूर्व डिप्टी सीएम सुखजिंदर सिंह रंधावा, लुधियाना से पंजाब कांग्रेस प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, पूर्व मंत्री व पूर्व सांसद विजयइंद्र सिंगला को आनंदपुर साहिब, पूर्व विधायक कुलबीर सिंह जीरा को खडूर साहिब, अमृतसर से मौजूदा सांसद गुरजीत सिंह औजला, फतेहगढ़ से मौजूदा एमपी अमर सिंह, पटियाला से पूर्व सांसद डाॅ. धर्मवीर गांधी, संगरूर से विधायक सुखपाल सिंह खैरा को टिकट दी है।
वहीं, भाजपा ने पटियाला से सांसद परनीत कौर, लुधियाना से सांसद रवनीत सिंह बिट्टू, जालंधर से सांसद रहे सुशील कुमार रिंकू, होशियारपुर से पूर्व केंद्रीय मंत्री सोमप्रकाश की पत्नी अनीता सोम प्रकाश, खडूर साहिब से मनजीत सिंह मन्ना, गुरदासपुर से दिनेश सिंह बब्बू को अपना उम्मीदवार बनाया है। शिरोमणि अकाली दल ने भी सुरक्षित खेलते पूर्व मंत्रियों दलजीत सिंह चीमा को गुरदासपुर व अनिल जोशी को अमृतसर से टिकट दी है। इनके अलावा पूर्व विधायक इकबाल सिंह झूंडा को संगरूर, पूर्व कांग्रेसी विधायक मोहिंदर सिंह केपी को जालंधर, पूर्व सांसद राजविंदर सिंह को फरीदकोट, पूर्व सांसद प्रेम सिंह चंदूमाजरा को आनंदपुर साहिब और पूर्व विधायक एनके शर्मा को पटियाला से उम्मीदवार बनाया है।
ज्यादा प्रयोग करने से बच रहीं पार्टियां: टिवाणा
राजनीतिक मामलों के माहिर पंजाबी यूनिवर्सिटी से प्रोफेसर बलविंदर सिंह टिवाणा के मुताबिक पंजाब में इस बार का चुनाव कई मायनों में पहले के मुकाबले अलग है। अब तक गठबंधन करके चुनाव लड़ने वाले दल इस बार अलग-अलग होकर चुनावी अखाड़े में उतरे हैं। 2019 में शिरोमणि अकाली दल व भाजपा ने मिलकर चुनाव लड़े थे, लेकिन इस बार दोनों में समझौता नहीं हो पाया। ऐसे में कई सीटों पर भाजपा व अकाली दल के उम्मीदवारों में कड़ी टक्कर देखने को मिल सकती है।
उधर, सत्तारूढ़ आप की साख भी दांव पर है। हालांकि, केंद्र में आप इंडिया गठबंधन का हिस्सा है, लेकिन पंजाब में दोनों पार्टियां एक-दूसरे के खिलाफ खड़ी हैं। वहीं कांग्रेस के सामने भी पिछला प्रदर्शन दोहराने की चुनौती है। 2019 के चुनावों में कांग्रेस ने 13 में से आठ सीटें जीती थीं। उस समय पंजाब में कांग्रेस की सरकार थी। ऐसे में कोई भी पार्टी बेवजह का प्रयोग न करते हुए मजबूत उम्मीदवारों को ही चुनावी अखाड़े में उतार रही है। इसके लिए जोड़-तोड़ की राजनीति भी खूब हो रही है। दूसरी पार्टियों के नेता तोड़कर लाए जा रहे हैं और उन्हें टिकट देकर नवाजा जा रहा है।