पंजाब का चुनावी अखाड़ा केवल तंज और शतरंज का खेल बनकर रह गया है। मुद्दों पर कोई दल बात नहीं कर रहा। सिर्फ शब्दों के बाण ही चल रहे हैं। प्रदेश के ज्वलंत मुद्दों पर राजनीतिक दल दिशाहीन दिखाई पड़ रहे हैं।
मुद्दों से दिशाहीन प्रत्याशियों व राजनीतिक दलों के तंज और शाब्दिक बाण भी सोशल मीडिया के सहारे हैं, इन्हें सुनने के लिए अब जनता मन नहीं बना रही।
मुख्यमंत्री मान 13-0, केजरीवाल व निशुल्क सेवाओं के सहारे
प्रदेश में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी से मुख्यमंत्री भगवंत मान इन दिनों हर संसदीय क्षेत्र में प्रत्याशियों के लिए रोड शो कर रहे हैं। सीएम मान भी 13-0, तिहाड़ जेल में बंद केजरीवाल और निशुल्क सेवाओं के सहारे प्रचार मैदान में दिख रहे हैं। सीएम ने इन चुनावी रैलियाें में एक बड़ा दावा जरूर किया है, लेकिन वह नया नहीं है। उन्होंने कहा कि वह प्रदेश की महिलाओं से किए एक हजार रुपये प्रति माह के आर्थिक सहायता के वायदे को जल्द पूरा करेंगे। सीएम ने इन चुनावी रैली में जनहित या प्रदेश के उत्थान के लिए कोई नई घोषणा नहीं की है, लेकिन वह बीते दो सालों के कार्याें के सहारे जनता से वोट मांग रहे हैं।
कांग्रेस कैडर व गढ़ को बचाने, अपनों को मनाने में जुटी
प्रदेश में कांग्रेस अपने कैडर, गढ़ और वजूद को बचाने में जुटी है। 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले सत्ता सुख से बाहर हुई कांग्रेस को अब हाईकमान के न्याय पत्र से मतदाताओं से न्याय की उम्मीद है। कांग्रेस को चुनाव से पहले कई बड़े झटके लग चुके हैं। प्रदेश के पूर्व सीएम बेअंत सिंह के पोते रवनीत बिट्टू, चौधरी परिवार से करमजीत कौर चौधरी और फिल्लौर से विधायक बिक्रमजीत सिंह चौधरी और युवा नेता दलवीर गोल्डी कांग्रेस का दामन छोड़ चुके हैं। सबसे पहला झटका पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह की पत्नी परनीत कौर ने दिया था। यहां तक कि कांग्रेस भी जनहित मुद्दों से दूर दल-बदल की राजनीतिक के भंवर में फंसकर अपनों को मनाने में जुटी है।
पुराने मुद्दों पर लौटा शिरोमणि अकाली दल
प्रदेश पार्टी के रूप में पहचान रखने वाले शिरोमणि अकाली दल शिअद का जन्म जिन उद्देश्यों के लिए हुआ था, लंबे अरसे से दल उससे भटक गया था। गठजोड़ की राजनीति छोड़ अब शिअद ने एक बार फिर अपने उद्देश्यों को याद कर घर वापसी की है। प्रदेश में पंथक मुद्दों को लेकर शिअद ने एक बार फिर अपनी राजनीतिक डगर तय करने का मन बनाया है, लेकिन जनहित के मुद्दों पर अभी शिअद का मेनिफेस्टो तैयार हो रहा है। शिअद के नेता भी मुद्दों के बजाय निजी हमलों में ही लगे हैं।
मोदी की गारंटी के भरोसे भाजपा
किसानी मुद्दों पर शिअद से अलग होकर भाजपा पहली बार प्रदेश में अकेले लोकसभा चुनाव लड़ रही है। प्रदेश इकाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी पर अपने पैरों पर खड़े होने का दमखम दिखा रही है, लेकिन प्रदेश का किसान भाजपा को अपने पैरों पर खड़े होने देने के लिए जमीन देने को तैयार नहीं दिख रहा। यूं तो प्रदेश में सभी दलों को किसानों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन भाजपा के प्रत्याशियों विरोध कुछ ज्यादा दिखाई पड़ रहा है।