शिअद ने आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार ने सूबे के किसानों को बदनाम करने की साजिश रची है। पूर्व सांसद प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने कहा कि गृह मंत्रालय का पत्र खुद विरोधाभासी है। पत्र में एक तरफ तो दावा किया जा रहा है कि बीएसएफ ने 58 बंधक मजदूरों को छुड़ाया था, वहीं ‘मानव तस्कर गिरोह’ अच्छे वेतन का लालच देकर गुरदासपुर, अमृतसर, फिरोजपुर और अबोहर में उत्तर प्रदेश व बिहार के मजदूरों को बहला फुसलाकर लाते हैं।
चंदूमाजरा ने गृह मंत्रालय से सवाल किया कि क्या ये दोनों चीजें एक साथ हो सकती हैं? उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय के पत्र से पूरे देश में गलत संदेश जाएगा और इससे टकराव का माहौल बनेगा। पत्र में उल्लेखित किसी भी क्षेत्र में किसी भी व्यक्ति को बंधुआ मजदूर के रूप में काम करने के लिए मजबूर किए जाने की एक भी प्राथमिकी नहीं है। वास्तव में सच इसके उलट है। पंजाब के किसान मजदूरों को उनकी सेवाओं का अग्रिम भुगतान करते हैं। पूर्व सांसद ने कहा कि रिपोर्ट को तुरंत वापस लिया जाना चाहिए।
केंद्र की ओछी राजनीति : औजला
अमृतसर से लोकसभा सांसद गुरजीत सिंह औजला ने कहा है कि केंद्र सरकार के रवैये से सभी वाकिफ हैं। सभी जानते हैं कि किसान आंदोलन में शहीद हुए 300 किसानों के लिए केंद्र सरकार की ओर से एक शब्द नहीं कहा गया। औजला ने कहा कि किसान आंदोलन को बदनाम करने के लिए केंद्र सरकार ने यह ओछी राजनीति शुरू की है।
औजला ने अमृतसर का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके हलके में एक लाख किसान हैं और कहीं भी ऐसी स्थिति नहीं है कि प्रवासी मजदूरों से अमानवीय व्यवहार किया जाता हो। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर केंद्र सरकार को ऐसी किसी स्थिति का पता था तो मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से इस बाबत क्यों बात नहीं की? दरअसल केंद्र सरकार इस तरह के आरोपों के जरिए किसान आंदोलन को बदनाम करने के साथ-साथ जनता को असली मुद्दों से भटकाने की कोशिश कर रही है।