आयोग ने पाया कि यह कोरोना के दिशा निर्देश का उल्लंघन है। इसलिए उन्होंने मॉडर्न जेल के जेल सुपरिंटेंडेंट को आदेश दिए कि वह ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई करें, जो आरोपियों व कैदियों को मास्क भी मुहैया नहीं करा पा रहे हैं। आयोग ने कहा कि मास्क नहीं पहनना एक अपराध है। ऐसे में आयोग के सामने पेश होने के लिए आने पर भी मास्क नहीं देना यह गंभीर बात है।
हैरान करने वाली बात है, सरकारी विभाग ही निर्देश की अवहेलना कर रहे: आयोग
आयोग ने कहा कि यह बहुत हैरान करने वाली बात है कि सरकारी विभाग ही भारत सरकार के दिशानिर्देश की अवहेलना कर रहे हैं। आयोग ने कहा कि अगर पुलिस विभाग के पास पैसों की कमी है, जिससे कि वह मास्क नहीं खरीद पा रहा तो वह आयोग से संपर्क करे। आयोग पुलिस को 5000 रुपये देने को तैयार है।
पुलिस विभाग आईएफएससी कोड के साथ बैंक खाता भी भेज सकता है, ताकि यह राशि उनके खाते में भेजी जा सके। आयोग ने कहा कि यह अच्छा काम है, इसलिए आयोग खुशी-खुशी इसे करना चाहेगा। मामले की सुनवाई के बाद आरोपी को 20 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। अब 27 जुलाई को दोबारा आरोपी को कोर्ट में पेश किया जाएगा। आयोग के अध्यक्ष राजन दीवान, सदस्य प्रीति मल्होत्रा और बीएम शर्मा के इस आदेश की कॉपी मॉडर्न जेल के जेल सुपरिंटेंडेंट को भी भेजी गई है, ताकि वह इस संबंध में आगे की कार्रवाई कर सकें।