हरियाणा सरकार और पंजाब सरकार ने लागू की जांच अधिकारियों के लिए व्यवस्था
वित्तीय बोझ और प्रभावित होती पुलिसिंग की दलील देते हुए दाखिल की गई याचिका
पंजाब सरकार ने सौंपा आंकड़ा, पहले 600 तो अब केवल 80 आते हैं हाईकोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। आपराधिक मामलों में सरकारी वकील को सहयोग के लिए पंजाब के विभिन्न जिलों से रोजाना कानून-व्यवस्था की ड्यूटी छोड़ करीब 600 पुलिस अधिकारियों को अब हाईकोर्ट के चक्कर लगाने नहीं पड़ेंगे, पंजाब सरकार ने नई व्यवस्था लागू की है। अब केवल 80 पुलिस अधिकारी ही अदालत आते हैं, वह भी बेहद जरूरी होने पर या कोर्ट के आदेश पर। पंजाब सरकार ने यह जानकारी हाईकोर्ट को दी है, हाईकोर्ट ने रजिस्ट्री को आदेश दिया है कि इस जानकारी की पुष्टि की जाए। हरियाणा सरकार पहले ही इसके लिए नीति बना चुकी है।
एडवोकेट एचसी अरोड़ा ने अपनी याचिका में बताया कि रोजाना पंजाब के आपराधिक मामलों में सुनवाई के लिए रिकाॅर्ड के साथ पुलिस के करीब 600 जवान विभिन्न जिलों से हाईकोर्ट पहुंचते हैं। याची ने बताया कि यह पुलिस अधिकारी हिरासत की अवधि से जुड़े प्रमाणपत्र व केस से जुड़ी जानकारी उपलब्ध करवाने में सरकारी वकील की सहायता का काम करते हैं। जिस दिन वे हाईकोर्ट आते हैं उस दिन पंजाब की जनता उनकी पुलिसिंग और जांच की सेवाओं से वंचित रहती है।
इसके साथ ही दूसरा पहलू यह भी है कि हाईकोर्ट का परिसर पुलिसवालों से भरा रहता है, वाहनों व कोर्ट में मौजूद सीटों की उपलब्धता भी इससे कम हो जाती है। इस समस्या से निजात पाने के लिए हरियाणा एडवोकेट जनरल कार्यालय ने कुछ प्रोफार्मा तैयार किए हैं, जिन्हें संबंधित डीएसपी द्वारा भरकर एडवोकेट जनरल हरियाणा के कार्यालय में नोडल अधिकारियों को ऑनलाइन जमा कराते हैं। इसमें आपराधिक मामले के बारे में सभी प्रासंगिक और संभावित जानकारी होती है। इस से न केवल संसाधनों का बचाव होता है, बल्कि पुलिस अधिकारी पुलिसिंग के लिए प्रदेश में मौजूद रहते हैं।