उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से छह साल पहले लापता हुआ मासूम वर्दी के प्रयास से अपनी मां से मिला। अपने लाल को पाकर मां ने उसे सीने से लगा दिया और बाल आश्रम संचालकों का धन्यवाद किया।
मां और बेटे का मिलन करवाने में मुख्य किरदार निभाया उत्तराखंड़ पुलिस की ‘स्माइल’ योजना ने। इसी के तहत लापता बच्चों को खोजते हुए उत्तराखंड पुलिस भिवानी बाल आश्रम पहुंची और उन्हें लापता बच्चा मिला। फिलहाल बच्चा अपनी मां से मिलकर खुश है।
तोशाम ओवरब्रिज के पास अनाथ आश्रम में रहने वाले आठवीं कक्षा में पढ़ने वाला किशोर 15 वर्षीय मनीष के सामने रविवार सुबह छह वर्ष बाद उसकी मा बृजेश थी। मां को सामने देख गले लगा।
मां ने भी अपनी लाल को सीने से लगाते हुए आश्रम संचालकों का धन्यवाद किया। मां ने बताया कि उसका छोटा लड़का तो मनीष को पहचान भी नहीं पाएगा। वह तो उस समय बहुत छोटा था।
घर से नाराज होकर भिवानी पहुंच गया था मनीष
करीब नौ वर्ष की उम्र में मनीष नाराज होकर घर से निकल आया और एक बस में बैठ गया। वह बस से दिल्ली पहुंच गया। वापस घर जाने के लिए बस में बैठा तो भिवानी जिले के गांव बलियाली पहुंच गया। यहां से उसे सुभाष नंबरदार भिवानी बाल आश्रम लाया। तब से मनीष बाल आश्रम में ही रहकर पढ़ाई कर रहा है।
बेटे को तलाशते-तलाशते बंद हो गई पिता की आंखे
बेटे से मिलने के बाद महिला बृजेश ने बताया कि वे पिछले छह वर्ष से बेटे मनीष को ढूंढ रहे थे। हर जगह तलाश किया। पुलिस में भी शिकायत दी। मनीष अपने पिता नवाब का लाडला था और उसके पिता उसके गुम होने के गम में बीमार रहने लगे। बीमार होते हुए भी मनीष की तलाश की। करीब डेढ़ साल पहले उनका निधन हो गया।
अभी पढ़ाई के लिए वापस आएगा मनीष
छह साल बाद मां से मिला मनीष रविवार को अपने परिजनों के साथ अपने पैतृक गांव अंधावली के लिए रवाना हो गया। करीब छह दिन बाद वह वापस भिवानी आएगा। वह यहां आठवीं कक्षा में पढ़ता है और यहीं से वह आठवीं की पढ़ाई पूरी करेगा। इसके बाद आगे की पढ़ाई वह अपने गांव से करेगा। मां ने आश्रम संचालकों को आश्वासन दिया कि मनीष की पढ़ाई में कोई बाधा नहीं आएगी।