राजदीप सिंह को अदालत में ले जाती पुलिस।
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चंडीगढ़। सेक्टर-37 में करोड़ों की कोठी पर कब्जा करने की साजिश में शामिल चंडीगढ़ पुलिस के इंस्पेक्टर राजदीप सिंह को अदालत ने दो दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी से 2017 में दी गई शिकायत की कॉपी, कोठी के सौदे में दी गई रकम में हिस्सेदारी और अन्य संपत्तियों को कब्जा करने में भूमाफिया की मदद करने संबंधी जानकारी हासिल करनी है। पुलिस को शक है कि इस पूरे मामले में राजदीप ने आरोपियों की मदद करने के एवज में पैसे लिए थे। इन दलीलों के साथ पुलिस ने पांच दिन का रिमांड मांगा, लेकिन अदालत ने सिर्फ दो दिन का रिमांड मंजूर किया।
पुलिस के मुताबिक, 14 जनवरी 2017 को कोठी के किराएदार प्रदीप रतन ने सेक्टर-39 के थाने में आकर शिकायत दी थी कि सेक्टर-37 की कोठी नंबर 340 पर पत्रकार संजीव महाजन समेत कई लोग कब्जा करने की फिराक में हैं। कोठी के मालिक राहुल मेहता भी काफी दिनों से गायब हैं। इस शिकायत के साथ प्रदीप रतन ने राहुल मेहता का एक मेडिकल सर्टिफिकेट दिया था। उस दौरान थाने में मौजूद तत्कालीन एसआई भूपेंद्र सिंह ने शिकायत लेकर डीडीआर दर्ज कर ली। साथ ही कहा कि एसएचओ थाने में नहीं हैं। शाम को वह आएंगे, तभी आप भी आना। शाम को जब प्रदीप रतन पहुंचे तो एसआई ने कहा कि एसएचओ ने इस केस को देख लिया है और कहा कि यह मकान मालिक व किराएदार के बीच का मामला है इसलिए इसमें शिकायत नहीं बनती है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि इस मामले की डीडीआर तो मिल गई है, लेकिन उससे शिकायत की कॉपी गायब है।
पुलिस को शक है कि राजदीप सिंह ने ही इस शिकायत की कॉपी को गायब किया है। अदालत में पुलिस ने यह भी बताया कि जब कोठी पर कब्जा करने की कोशिश हुई थी तो इसकी जानकारी राजदीप के पास थी। इसके बावजूद उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं बल्कि आरोपियों का साथ देकर शिकायतकर्ताओं पर दबाव बनाया था। सेक्टर-39 थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी राजदीप सिंह शुक्रवार को गिरफ्तार किया गया था। तीन दिन पहले एसआईटी ने पूछताछ के लिए उसे समन भेजा था। सेक्टर-31 थाने में गिरफ्तारी के बाद उसे निलंबित कर दिया गया है।