संदिग्ध कोचिंग सेंटर, परीक्षार्थी और संदिग्ध अध्यापकों पर निगरानी रखी जा रही है। सभी जिलों की साइबर सेल सोशल मीडिया पर नजर गढ़ाए हैं। डीजीपी पीके अग्रवाल और सीआईडी चीफ आलोक मित्तल परीक्षा को लेकर पल-पल की खबर ले रहे हैं। सभी जिलों के एसपी को इस संबंध में कड़े निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी सूरत में पेपर लीक और आउट नहीं होना चाहिए। सुरक्षा की दृष्टि से सभी परीक्षा केंद्रों के बाहर पुलिस का कड़ा पहरा होगा और पहले के मुकाबले पुलिस कर्मचारियों की संख्या अधिक होगी।
ये आरोपी बढ़ा रहे टेंशन
पेपर लीक मामले में कुल 312 आरोपी अभी फरार हैं और 671 आरोपी जमानत पर हैं। आशंका है कि माफिया के सदस्य सीईटी पेपर को लेकर गड़बड़ी कर सकते हैं। यह परीक्षा सरकार के लिए काफी अहम है, क्योंकि इससे 10 लाख से अधिक युवाओं का भविष्य जुड़ा है और दो साल के लंबे इंतजार के बाद यह परीक्षा हो रही है। ऐसे में सरकार किसी भी सूरत में कोई ढिलाई नहीं चाहती है।
रिपोर्ट के मुताबिक अंबाला के 8, भिवानी के 101, दादरी के 6, फरीदाबाद-यमुनागर 10-10, फतेहाबाद के 7, हिसार 68, जींद 47, कैथल 89, करनाल-कुरुक्षेत्र-सिरसा 2-2, नारनौल 7, पंचकूला 113, पानीपत 102, रेवाड़ी 33, रोहतक के 64 आरोपी जमानत पर बाहर हैं।
अब तक 28 पेपर लीक होने के आरोप
विपक्ष आरोप लगाया रहा कि वर्ष 2014 से अब तक कुल 28 पेपर लीक हो चुके हैं लेकिन हरियाणा सरकार केवल चार पेपरों को ही लीक मानती है। इनमें ग्राम सचिव, एएलएम, यूडीसी और पुलिस सिपाही भर्ती का पेपर शामिल है। इसके अलावा, नौकरियों को लेकर हर भर्ती में गड़बड़ी और फर्जीवाड़ा सामने आ रहा है। बार-बार पेपर लीक होना और परिणाम संशोधित होने से अभ्यर्थियों को परेशानी होती है।
इसी साल अब तक आ चुके 15 मामले
पेपर लीक और आउट के मामलों की बात करें तो इसी साल अब तक कुल 15 केस दर्ज किए जा चुके हैं और 109 आरोपी गिरफ्तार किए हैं। 2021 में 32 केसों में 427, 2020 में 2 केसों में 21, 2019 के 6 केसों में 25, 2028 में 5 केसों में 26, 2017 में 5 केसों में 16, 2016 में 5 केसों में 54, 2015 में 5 केसों में 55 और साल 2014 में 1 मामले में 9 आरोपी काबू किए गए हैं।