मात्र सात वर्ष की आयु से लेखन शुरू करने वाली हिंदी साहित्य की प्रसिद्ध लेखिका और कवयित्री महादेवी वर्मा के जन्म दिवस के उपलक्ष्य में टैगोर थियेटर में रविवार को कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम पटियाला के उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र की ओर से आयोजित किया गया।
कवि नरेश नाज की अध्यक्षता में हुए कार्यक्रम का संचालन कवि वीरेंद्र शर्मा वीर ने किया। इस आयोजन में कई कवियों ने हिस्सा लिया। रजनी बजाज ने उनकी अग्नि रेखा कविता पढ़ी, जो कि उन्होंने मरने से कुछ समय पहले 1987 में लिखी थी। प्रोफेसर सौभाग्य वर्द्धन ने उनकी कविता ‘मैं भारत की आन बान सम्मान की खातिर जीती हूं’ पढ़कर श्रोताओं की खूब तालियां बटोरीं।
डॉ. उर्मिल कौशिक सखी ने महादेवी वर्मा के जीवन का परिचय दिया। उन्होंने बताया कि 26 मार्च 1907 को उनका जन्म उत्तर प्रदेश के फरुखाबाद में हुआ था। उनके परिवार में सात पीढ़ियों के बाद किसी लड़की का जन्म हुआ था। उन्हें देवी का रूप माना गया, इसलिए उनका नाम भी महादेवी रखा गया। इंदौर में उनकी प्राइमरी शिक्षा पूरी हुई।
पढ़ाई के दौरान उनकी दोस्ती सुभद्रा कुमारी चौहान से हुई। 1916 में उनकी शादी बरेली के एक गांव निवासी स्वरूप नारायण वर्मा से हुई। उन्होंने अपनी जिंदगी में कभी शीशा नहीं देखा। उन्होंने निहार, रश्मी सहित कई कविताएं लिखीं। इसके बाद उन्हें ज्ञानपीठ, पद्म भूषण और पद्म विभूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया।