चंडीगढ़। सेक्टर-10 की आर्ट गैलरी एवं म्यूजियम में थिंकर्स कलेक्टिव की ओर से आयोजित कार्यक्रम में दिल्ली के कवि अब्बास कमर ने काव्य पाठ से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कमर ने अपनी कविता के माध्यम से कई विषयों को छुआ और समकालीन सामाजिक और राजनीतिक चिंताओं को उजागर किया।
राजनीति विज्ञान में शोध कर रहे कवि ने कहा कि उनकी रचनाएं वास्तविक जीवन के अनुभवों से उपजी हैं, जिससे वे श्रोताओं से आसानी से जुड़ पाती हैं। कार्यक्रम की शुरुआत कमर और पत्रकार निरुपमा दत्त के बीच हुई बातचीत से हुई, जिन्होंने कवि से उनके शुरुआती प्रभावों और रचनात्मक प्रक्रिया के बारे में बात की।
इसके बाद कवि ने कवि ने अश्कों को आरजू-ए-रिहाई है रोइए, तन्हाई एक ही तमाशा है, दरबारी हैं आप , सौदा बारा-ए-जिंदगी आसां कर दिया और फनकार नहीं हूं मैं सहित कई गजलें सुनाईं।
इस मौके पर कवि अब्बास कमर ने बताया कि मेरे नाना कवि थे, हालांकि उनका काम धार्मिक कविताओं तक ही सीमित था। वह मेरी पहली प्रेरणा थे। वर्ष 2014 में दिल्ली में कॉलेज के अपने पहले वर्ष के दौरान मुझे एहसास हुआ कि कविता विचारों और भावनाओं को व्यक्त करने का सबसे ईमानदार और सटीक तरीका प्रदान करती है, जिन्हें सीधे व्यक्त करना संभव नहीं होता। वहीं उन्होंने कहा कि अब उन उन आयोजनों और मंचों में आई गिरावट, जहां पारंपरिक रूप से कवि अपनी रचनाएं साझा करने के लिए एकत्रित होते थे।