धरती मां को प्यार करें
गुरबचन कहते हैं कि पराली जलाने से धरती मां का कलेजा आग से फट जाता है। किसानों को चाहिए कि धरती मां को प्यार करते हुए पराली को आग न लगाएं। इसे धरती के बेशुमार जीव जंतु भी बच जाएंगे।
गुरबचन सिंह हैं रोल मॉडल: डीसी
डीसी प्रदीप सभ्रवाल किसान गुरबचन सिंह को सम्मानित करने के लिए उनके घर आ चुके हैं। डीसी सभ्रवाल ने किसान के उद्यम पर खुशी जाहिर करते हुए कहा था कि गुरबचन सिंह इलाके के किसानों के लिए रोल मॉडल हैं। उन्होंने वादा किया था कि आने वाले दिनों में किसान गुरबचन सिंह को प्रशासन की ओर से विशेष सम्मान दिया जाएगा।
पीएम मोदी ने की सराहना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मन की बात में कहा कि पंजाब के किसान भाई गुरबचन सिंह जी एक सामान्य और परिश्रमी किसान हैं। प्रधानमंत्री ने उनके बेटे की शादी में लड़की के परिवार से खेत में पराली न जलाने का वचन लेने की बात को अत्यंत सराहा और कहा कि गुरबचन सिंह जी के परिवार ने पर्यावरण को बचाने की एक मिसाल दी है। उन्होंने कहा कि पंजाब के एक गांव कल्लर माजरा के बारे में पढ़ा जो नाभा के पास है। कल्लर माजरा इसलिए चर्चित हुआ है क्योंकि वहां के लोग धान की पराली जलाने के बजाय उसे जोतकर उसी मिट्टी में मिला देते हैं। पीएम ने कहा कि जिस तरह बूंद-बूंद से सागर बनता है, उसी तरह छोटे-छोटे सकारात्मक कार्य हमेशा सकारात्मक माहौल बनाने में बहुत बड़ी भूमिका अदा करते हैं।
समाज गुरबचन से प्रेरणा ले : सेवा सिंह
तरनतारन के पद्मश्री बाबा सेवा सिंह खडूर साहिब वालों ने गुरबचन सिंह की प्रशंसा करते कहा कि समाज को इस किसान से प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पराली को आग लगाने से पर्यावरण ही खराब नहीं होता, बल्कि इससे मित्र जीव जंतु और पेड़ भी जल जाते हैं। मित्र कीटों के मरने से फसलों को ज्यादा बीमारियां लगती हैं। उन्होंने कहा कि 67 फीसदी खाद पराली में रह जाती है और बाकी 33 फीसदी फसल को लगती है। इस वजह से पराली को खेत में जोतने से 60 फीसदी खाद की पूर्ति हो जाती है।