मालूम हो कि इससे पहले हर साल सिर्फ 15 अप्रैल से जून माह तक पानी बर्बाद करने वालों के खिलाफ मुहिम चलाई जाती रही है। शहर में पानी की बर्बादी करने वालों पर नजर रखने के लिए नगर निगम अलग से टीमों का भी गठन करेगा। मालूम हो कि सबसे ज्यादा बागवानी में साफ पीने के पानी की बर्बादी वीआईपी इलाकों में होती है, क्योंकि वहां पर ही लोगों के बगीचे हैं। वाटर बायलॉज में हुए संशोधन के अनुसार अब एक कनाल से ऊपर तक के मकानों में टरशरी वाटर की सप्लाई का कनेक्शन भी जरूरी है लेकिन अभी भी कई कोठियों ने कनेक्शन नहीं लिए हैं।
पानी की लीकेज पर भी चालान
अगर किसी के घर के आगे पानी की लीकेज हो रही है या फिर वॉटर मीटर में से पानी बह रहा है या फिर कूलर में से पानी बहेगा तो भी पांच हजार रुपये का चालान काटा जाएगा। अगर कोई जुर्माने की राशि अदा नहीं करेगा तो पानी के बिल में यह राशि जुड़कर आ जाएगी। अधिकारियों के अनुसार बूस्टर पंप और पानी चढ़ाने के लिए मोटर का इस्तेमाल करने वालों पर भी नजर रखी जाएगी। अगर कोई बाल्टी में से कम पानी का प्रयोग करके गाड़ी साफ करता है या फिर सिंचाई करता है तो उस पर कार्रवाई नहीं की जाएगी।