प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चंडीगढ़ की जनता को बेसब्री से इंतजार है। वे मोदी से 7 बड़ी सौगातें मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। यूटी प्रशासन द्वारा दो दिन पहले ही शहर के अधूरे प्रोजेक्ट की लिस्ट प्राइम मिनिस्टर ऑफिस(पीएमओ) को भेज दी गई।
सूत्रों के अनुसार शुक्रवार प्रधानमंत्री लिस्ट में से दो से तीन प्रोजेक्ट के लिए पैसा देने की घोषणा कर सकते हैं। सूत्रों के अनुसार प्रशासन को प्रधानमंत्री से सेक्टर-32 जीएमसीएच को सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल बनाने और सेक्टर-53 में ट्रामा सेंटर के लिए पैसा मिलने की उम्मीद है।
पुलिस कर्मचारियों के लिए धनास में बनने वाली हाउसिंग प्रोजेक्ट और स्मार्ट सिटी के लिए सीवरेज और पानी की पाइपें बदलने के लिए पैसा देने का ऐलान कर सकते हैं।
स्कूल और कालेजों की जरूरत
देश में दूसरे नंबर पर साक्षरता वाले चंडीगढ़ में प्राइमरी और हायर एजुकेशन के लिए स्कूल और कालेजों की कमी है। चंडीगढ़ के मास्टर प्लान में भी 20 नए स्कूल और दो नए कालेज प्रस्तावित हैं। मोदी एजुकेशन के लिए पैसा देने की घोषणा कर सकते हैं।
नए अस्पताल बनाने की जरूरत
शहर में पीजीआई पर लगातार मरीजों का बोझ बढ़ता जा रहा है। ट्राइसिटी ही नहीं हरियाणा,पंजाब, हिमाचल और जम्मू के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। मनीमाजरा के अलावा शहर के साउथ हिस्सों में नए अस्पताल बनाने की जरूरत है।
मेट्रो के लिए 15 हजार करोड़
केंद्र सरकार ने चंडीगढ़ में मेट्रो चलाने को मंजूरी दे दी है। लेकिन ट्राइसिटी में चलने वाली मेट्रो के लिए 15 हजार करोड़ से अधिक धन जुटाने की जरूरत होगी। यूटी प्रशासन के लिए मेट्रो के लिए पैसा जुटाना बड़ी चुनौती होगी। मोदी से मेट्रो के लिए भी बड़े बजट की उम्मीद है।
एजुकेशन सिटी
चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा एजुकेशन सिटी का प्रपोजल ठंडे बस्ते में है। मुल्लांपुर में एजुकेशन सिटी के लिए जगह प्रस्तावित की गई है। लेकिन कई साल से पैसे की कमी के कारण निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ सका है।
कर्मचारियों को चाहिए घर
यूटी के सरकारी कर्मचारी चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड द्वारा लकी ड्रा में नाम आने के बाद भी मकान देने में आनाकानी कर रहा है। करीब 4 हजार यूटी कर्मचारी 2008 से मकानों के लिए आंदोलन कर रहे हैं। प्रधानमंत्री दौरे से इन कर्मचारियों को मकान मिलने की बड़ी उम्मीदे हैं।
पब्लिक ट्रांसपोर्ट को दुरूस्त करना होगा
शहर में अब दिल्ली और अन्य शहरों जैसा जाम लगने लगा है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम को दुरुस्त करने की जरूरत है। शहर की सड़कों पर बस सर्विस तेज करने के लिए करोड़ों की लागत से नई बसें खरीदनी होंगी। मेट्रो के शुरू होने से पहले पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम के लिए बड़े बजट की जरूरत है।
पीजीआई से कम हो मरीजों का बोझ
पीजीआई में हर साल 21 लाख से अधिक मरीज इलाज के लिए आते हैं। करीब 70 हजार इनडोर मरीज इलाज के लिए आता है। पीजीआई पर लगातार मरीजों का बोझ बढ़ता जा रहा है। इससे मरीजों को इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। मरीज चाहते हैं कि उन्हें समय पर अच्छा इलाज मिल सके।