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किसानों के लिए ‘कुसुम’ लाएगी खुशहाली, हरियाणा में लॉन्च की गई योजना, कर्म खर्च में फायदे ज्यादा

Thu, 09 Jan 2020 10:16 AM IST
खुशबू गोयल मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
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खेतों में काम करते किसान - फोटो : फाइल फोटो
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हरियाणा में केंद्र सरकार की पीएम कुसुम योजना लॉन्च कर दी गई है, जो किसानों के जीवन में खुशहाली लेकर आएगी। कृषि कार्यों के दौरान बिजली बचत करने, किसानों के बिजली खर्च को कम करने और सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के मकसद से यह योजना लागू की गई है।
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यह योजना खासतौर पर किसानों के लिए हैं, जिसे किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक अहम प्रयास के रूप में भी जोड़ा जा रहा है। इस योजना के तहत हरियाणा में 10 हजार मेगवाट का डिसेंट्रलाइज्ड ग्राउंड माउंटेड ग्रिड स्थापित किया जाएगा, जो विभिन्न सोलर प्लांटों से कनेक्टेड होगा। हरियाणा सरकार ने इस प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाअभियान (पीएम-कुसुम) योजना का लाभ किसानों तक कैसे पहुंचेगा और उक्त सेटअप कैसे और कहां-कहां स्थापित होगा। इस पर होमवर्क शुरू कर दिया गया है।

हरियाणा बिजली विनियामक आयोग के चेयरमैन डीएस ढेसी की अध्यक्षता में बीस फरवरी को होने वाली एडवाइजरी कमेटी की बैठक में इस नई योजना के क्रियान्वयन पर चर्चा होगी। उतरी हरियाणा बिजली वितरण निगम व दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम इस योजना को आगे बढ़ाएंगे। हरियाणा में इस योजना को केंद्र सरकार के अधीनस्थ मिनिस्ट्री ऑफ न्यू एंड रिन्यूवेबल एनर्जी की निगरानी में चलाया जाएगा।
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500 किलोवाट से 2 मेगावाट के सोलर प्लांट लगेंगे

इस योजना के अंतर्गत इस ग्रिड को जिन सोलर प्लांटों से जोड़ा जाएगा। वे 500 किलोवाट से लेकर 2 मेगावाट क्षमता के होंगे। इसके लिए पहले चरण में केंद्र सरकार ने उतरी हरियाणा बिजली वितरण निगम ने 10 मेगावाट और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम को 15 मेगावाट की स्वीकृति दी है।

नए लगेंगे 17.50 लाख सोलर पॉवर एग्रीकल्चर पंप
इसी योजना के अंतर्गत किसानों के खेतों में 17.50 लाख नए स्टेंड एलॉन सोलर पॉवर्ड एग्रीकल्चर पंप स्थापित करने का लक्ष्य है।  इसी के अंतर्गत  हरियाणा में पहले से लगे 10 लाख ग्रिड कनेक्टेड एग्रीकल्चर पंपों का सोलराइजेशन भी किया जाएगा। ताकि सूबे में पूरी तरह से किसानों के एग्रीकल्चर पंप सौर ऊर्जा पर आधारित हो जाएं। केंद्र सरकार इसके लागत खर्च में 30 फीसद मदद करेगी। 30 फीसद खर्च राज्य सरकार को करना है।

खर्च का 30 फीसद राज्य सरकार बैंक लोन ले सकती है और शेष 10 फीसद खर्च किसान को वहन करना पड़ेगा। किसानों को इस योजना के लिए प्रोत्साहित किया जाए, इसके लिए दो पंप बतौर डेमो पहला 5 हार्स पॉवर का यमुनानगर के मारूपुर फीडर के अंतर्गत और दूसरा 10 हार्स पॉवर का करनाल के बाइना फीडर के अंतर्गत स्थापित किया जाएगा। भविष्य में इस योजना के क्रियान्वयन संबंधी रिपोर्ट के लिए डिस्कॉम जवाबदेह होगा।
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