हरियाणा के शहरों में बिना एनओसी के अब प्लाटों, मकानों की रजिस्ट्रियां हो सकेंगी। यह फैसला मंगलवार को मंत्रिमंडल की बैठक में किया गया। बैठक के बाद मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने बताया कि शहरों में पुरानी नगर निकायों और नियमित की गई 900 कालोनियों में रजिस्ट्री कराने में लोगों को काफी दिक्कत हो रही थी।
दिक्कत दूर करने के लिए रजिस्ट्री खोल दी हैं। अब एनओसी लेने की जरूरत नहीं होगी। जो कालोनियां नियमित की गई हैं उनमें रजिस्ट्री पर पूरी तरह रोक थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने नगर एवं ग्राम आयोजन ने प्रदेश के छोटे एवं मध्यम शहरों में ग्रुप हाउसिंग और प्लाट वाली कालोनी विकसित करने के लिए क्षेत्र मानदंडों पर दोबारा विचार करने का फैसला किया है।
इसके लिए मंत्रिमंडल सब कमेटी गठित की गई है। यह कमेटी जल्द ही उचित सिफारिशें करेगी। कमेटी की अध्यक्षता वित्तमंत्री हरमोहिंदर सिंह चट्ठा करेंगे। बिजली मंत्री अजय सिंह यादव, संसदीय कार्य मंत्री रणदीप सिंह सुरजेवाला और शिक्षा मंत्री गीता भुक्कल सदस्य होंगी।
पलवल, फरीदाबाद में बनीं दो उपतहसील
मुख्यमंत्री ने बताया कि जिला पलवल के गांव बहीन और फरीदाबाद के खेड़ी गुजरान को उप-तहसील बनाया जाएगा। मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी है। बहीन उप तहसील हथीन उपमंडल और तहसील का हिस्सा होगी। इस समय हथीन तहसील हथीन उपमंडल में ही शामिल है।
उप-तहसील बहीन, जिला मुख्यालय पलवल से लगभग 28 किलोमीटर और उपमंडल मुख्यालय से लगभग 13 किलोमीटर दूर स्थित है। रोहतक जिले में नव सृजित उप-तहसील लाखनमाजरा से दो गांव फरमाना खास और फरमाना बादशाहपुर को शामिल न करने का फैसला किया है।
दो गांव को निकालने के बाद उप-तहसील लाखनमाजरा में सात गांव रह जाएंगे। इस तहसील का कुल रकबा 12778 हेक्टेयर होगा और आबादी 45138 होगी। मंत्रिमंडल की बैठक में लोक निर्माण विभाग (भवन एवं सडकें) की रेवाड़ी में कोर्ट रोड पर स्थित भूमि में से एक हजार वर्ग गज भूमि मियांवाली जिला पंचायत घर और एक हजार वर्ग गज भूमि ग्रामीण सभा को आबंटित करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई।
राज्य चुनाव आयोग के नियम संशोधित
मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य निर्वाचन आयोग के ग्रुप ‘क’ कर्मचारियों की भर्ती एवं सेवाशर्तों को विनियमित करने के लिये राज्य निर्वाचन आयोग, हरियाणा (ग्रुप ‘क’) सेवा नियम-2014 लागू करने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई।
इन नियमों को लागू करना इस लिये आवश्यक हो गया है क्योंकि राज्य निर्वाचन आयोग में ग्रुप क कर्मचारियों के सेवा नियमों की गैर मौजूदगी के कारण आयोग एवं सरकार को इन पदों को राज्य सरकार या केंद्र सरकार के कर्मचारियों में से प्रतिनियुक्ति या स्थानांतरण आधार पर भरने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था।