जो प्लॉट असल में कहीं था ही नहीं, उसका भी सौदा कर 60 लाख रुपये ले लिए। जब खरीददार को इस बात का पता चला तो मामला पुलिस तक पहुंचा। लंबी जांच के बाद अब सेक्टर-20 थाने में मामला दर्ज कर लिया गया है।
आरोप सेक्टर-20 निवासी एक बिल्डर पर है, जबकि शिकायतकर्ता मलोट का रहने वाला है।
पुलिस को दी शिकायत में मलोट निवासी हरीश कुमार ने बताया कि सुशील बिंदल ने सेक्टर-20 पंचकूला में अपना दफ्तर बना रखा है। वह पंचकूला या आसपास के एरिया में प्रापर्टी खरीदना चाहता था।
इसी दौरान उनकी मुलाकात सुशील बिंदल से हुई। पांच सितंबर 2011 को सेक्टर-20 में सुशील बिंदल ने उन्हें अपने कार्यालय में बुलाया और विशांती एनक्लेव जीरकपुर में प्लाट नंबर 387 बेचने के लिए 60 लाख रुपये में डील की।
हरीश कुमार के मुताबिक, सुशील ने उन्हें बताया कि यह कालोनी नगर परिषद से मंजूर है। इसलिए उन्होंने इस प्लॉट की पूरी कीमत 60 लाख रुपये सुशील बिंदल को दे दी और सुशील ने अलॉटमेंट लेटर भी जारी कर दिया, लेकिन रजिस्ट्री कराने के लिए कुछ समय मांगा।
तय समय पर जब रजिस्ट्री के लिए संपर्क किया तो बिंदल ने टाल-मटोल शुरू कर दी। कई दिनों तक ऐसा ही चलता रहा, जिससे उन्हें गड़बड़ी की आशंका हुई।
उन्होंने अपने स्तर पर प्लाट के बारे में तहकीकात शुरू की। नगर परिषद जीरकपुर से रिकॉर्ड में जांच करवाई तो पता चला कि सुशील ने जो प्लाट दिखाया था, वह उस कालोनी में है ही नहीं।
इसके बाद उन्होंने सुशील से बातचीत की, तो उसने मिलने से ही इनकार कर दिया। इसके बाद मामला पंचकूला पुलिस तक पहुंचा और शिकायत दी गई।
जांच के बाद सेक्टर-20 थाने में आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467 (धोखा देने के लिए फोरजरी), 471 (नकली दस्तावेज को असली के तौर पर इस्तेमाल करना) के तहत मामला दर्ज कर लिया है।