पंजाब विश्वविद्यालय के 5 वर्षीय लॉ पाठ्यक्रम में प्रवेश हेतु आयोजित की जाने वाली परीक्षा को रद्द करने तथा मेरिट के आधार पर दाखिला करने के फैसले को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है। न्यायालय अब परीक्षाओं से जुड़े अन्य मामलों के साथ इस याचिका पर सुनवाई करेगा।
सोमवार को छात्र नव्या राज ने याचिका दायर कर तत्काल सुनवाई किए जाने की मांग की। जस्टिस एस मुरलीधर एवं जस्टिस अविनाश झिंगन की खंडपीठ ने याचिका पर मंगलवार को सुनवाई किए जाने के आदेश दे दिए हैं। दायर याचिका में न्यायालय को बताया गया है कि विश्वविद्यालय ने 11 अगस्त को सर्कुलर जारी कर 5 वर्षीय लॉ कोर्स में दाखिले ले लिए आयोजित की जाने वाली प्रवेश परीक्षा को रद्द किए जाने और अकादमिक अंकों के आधार पर दाखिला दिए जाने के निर्देश जारी किए हैं।
विश्वविद्यालय के इस कोर्स में दाखिले के लिए 25 अगस्त को जारी गाइड लाइंस को भी चुनौती दी है जिसमे कॉमर्स के छात्रों को कोई वेटेज तक नहीं दी गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि इस आधार पर कि कोरोना संक्रमण चल रहा है। इसलिए यह परीक्षा रद्द की गई है गलत है क्योंकि जब 3 वर्षीय लॉ की अक्तूबर में परीक्षा ली जा रही है तो 5 वर्षीय पाठ्यक्रम के लिए भी ऐसा क्यों नहीं किया जा सकता। यह सीधे तौर पर भेदभाव और एक ही वर्ग में अन्य वर्ग बनाए जाने का मामला है।