याचिकाकर्ता भीष्म किंगर ने हाईकोर्ट को बताया कि मालेरकोटला के सिविल अस्पताल में डॉक्टरों के 39 स्वीकृत पद हैं। सरकार क अनदेखी के चलते केवल 2 डॉक्टर अस्पताल में सेवा दे रहे हैं, बाकी पद खाली हैं। याची ने कोर्ट से आग्रह किया कि वो सरकार को यहां डॉक्टरों के खाली पद जल्द से जल्द भरने के आदेश दें।
मालेरकोटला के जिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी (केवल दो) को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई थी। इस पर मुख्य सचिव ने हाईकोर्ट को बताया कि वहां अब कुल 26 डाॅक्टर हैं। 19 डाक्टरों की नियुक्ति की गई है और 5 का तबादला कर वहां भेजा गया है। एमआरआई व सिटी स्कैन के लिए थर्ड पार्टी की व्यवस्था की जा रही है।
विज्ञापन
इस पर हाईकोर्ट ने सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि सरकारी मशीनरी क्यों स्थापित नहीं की जा रही है। हाईकोर्ट ने 24 मार्च तक इस विषय पर जवाब दाखिल करने का सरकार को आदेश दिया है।
याचिकाकर्ता भीष्म किंगर ने हाईकोर्ट को बताया कि मालेरकोटला के सिविल अस्पताल में डॉक्टरों के 39 स्वीकृत पद हैं। सरकार क अनदेखी के चलते केवल 2 डॉक्टर अस्पताल में सेवा दे रहे हैं, बाकी पद खाली हैं। याची ने कोर्ट से आग्रह किया कि वो सरकार को यहां डॉक्टरों के खाली पद जल्द से जल्द भरने के आदेश दें ताकि आम लोगों को राहत मिल सके। याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब मालेरकोटला जिला बन चुका है तो यहां डॉक्टरों के पद भरे क्यों नहीं नहीं जा रहे हैं। कोर्ट ने सरकार को कहा कि यह आम लोगों की सेहत से जुड़ा मामला है, सरकार इसे गंभीरता से ले। सरकार ने बताया था कि डाक्टरों के 400 पदों पर भर्ती निकाली गई है और 225 ने ज्वाइन भी कर लिया है। याची ने बताया था कि एक भी डाक्टर को मलेरकोटला में नियुक्ति नहीं दी गई है।