चंडीगढ़। पीजीआई में भर्ती मरीजों की सेहत से खिलवाड़ करने वाले दो लोगों को पुलिस ने शुक्रवार को गिरफ्तार किया है। सेक्टर-11 थाना पुलिस ने आरोपियों के पास से तीन रबर स्टैंप, प्रिंटर, ब्लड रिपोर्ट, सिरिंज और अन्य दस्तावेज बरामद किए हैं।
पुलिस के मुताबिक रबर स्टैंप और ब्लड रिपोर्ट जिस लैब की हैं, वह अस्तित्व में ही नहीं है। दस्तावेज भी फर्जी हैं। पुलिस ने दोनों आरोपियों को जिला अदालत में पेश किया, जहां से पांच दिन के रिमांड पर भेज दिया गया है। आरोपियों की पहचान मुल्लांपुर स्थित न्यू चंडीगढ़ के सेक्टर-6 निवासी नेमी चंद उर्फ राहुल (32) और नयागांव के दशमेश नगर निवासी सुनील कुमार (40) के रूप में हुई है। उधर, पीजीआई प्रशासन का कहना है कि पुलिस ने कुछ लोगों को पकड़ा है। फिलहाल पूरी जानकारी पीजीआई प्रशासन को नहीं है। पीजीआई प्रशासन पुलिस के संपर्क में है।
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। आरोपियों ने पीजीआई के स्टाफ को अपना सहयोगी बताया है। इसके बाद पुलिस उनकी भूमिका की भी जांच कर रही है।
पुलिस के अनुसार आरोपी एक गाड़ी लेकर पीजीआई के आसपास व अंदर घूमते रहते थे। आरोपियों ने बताया कि पीजीआई का स्टाफ उन्हें अंदर बुला लेता था। इसके बाद मरीजों का सैंपल लेकर आरोपी उन्हें फर्जी रिपोर्ट बनाकर दे देते थे। इसमें काफी महंगी जांचें होती थीं। इसके एवज में आरोपी पीजीआई के स्टाफ को कमीशन भी देते थे। पुलिस आरोपियों से अब तक जारी की गई फर्जी रिपोर्ट के बारे में पूछताछ कर रही है। पुलिस के अनुसार वह लगातार पीजीआई में आने वाले मरीजों को ठगों से बचने के लिए अनाउंसमेंट कर जागरूक करती रहती है ताकि वे किसी के झांसे में न आएं।
10 साल से चल रहा था खेल, पकड़ते ही केतन बंसल के नाम की जमाने लगा धौंस
पुलिस की ओर से पकड़े जाने पर आरोपियों ने बताया कि पिछले 10 साल से फर्जी रिपोर्ट बना रहे हैं। पुलिस ने एक सूचना पर सेक्टर-11 से दोनों आरोपियों को गाड़ी सहित दबोचा। इस दौरान आरोपी नेमीचंद एसपी केतन बंसल का नाम लेकर धौंस जमाने लगा। जब थाना पुलिस ने केतन बंसल से आरोपियों के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि वह किसी नेमीचंद को नहीं जानते हैं, जो कार्रवाई बनती है पुलिस करे। इसके बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया।
एफआईआर दर्ज करने से भागती रही पुलिस
इस मामले की गंभीरता पता चलने पर पुलिस एफआईआर दर्ज करने से बचती नजर आई। पुलिस का कहना था कि इस संबंध में ड्रग इंस्पेक्टर की कार्रवाई होगी। हालांकि बाद में पुलिस ने धोखाधड़ी के मामले में केस दर्ज किया है। पुलिस अब पीजीआई में सुरक्षा व्यवस्था की भी जांच करेगी क्योंकि एक वैन प्रतिदिन परिसर में घूमती रहती थी और सुरक्षाकर्मियों ने एक बार भी रोककर पूछा तक नहीं।
अमर उजाला ने उठाया था मुद्दा
अमर उजाला ने 6 जून के अंक में पीजीआई ओपीडी में दलालों का कब्जा, सीबीआई व विजिलेंस से जांच की मांग शीर्षक से खबर प्रकाशित हुई थी। इसके बाद प्रबंधन हरकत में आया और न्यू ओपीडी में एमआर के आने पर रोक लगा दी। यह खबर भी अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
कोट-
पीजीआई में भर्ती मरीजों की फर्जी रिपोर्ट बनाने वाले दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इनका अदालत से पांच दिन का रिमांड मिला है। दोनों आरोपियों की मोबाइल डिटेल खंगाली जा रही है। पीजीआई में इनके साथ कौन-कौन शामिल हैं, इसकी जांच भी की जा रही है।
-कुलदीप चहल, एसएसपी