अपने दम पर बच्चों की परवरिश करने वाली बेहद कम या बिना आय वाली महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इसके लिए हरियाणा, पंजाब और यूटी ने पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर तीन गांवों का चयन किया है। हाईकोर्ट की ओर से महिलाओं की स्थिति सुधारने को लेकर लिए गए स्व संज्ञान मामले की सुनवाई के दौरान यह जानकारी पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ की ओर से दी गई।
सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि पंजाब ने मोहाली के झामपुर, हरियाणा ने पंचकूला के गांव भरेली और चंडीगढ़ ने खुड्डा जस्सू को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चुना है और इन गांवों की महिलाओं और बच्चों के सामाजिक और आर्थिक सुधार के लिए मनेरगा सहित अन्य सरकारी योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करने की योजना बना ली है। इस जानकारी पर हाईकोर्ट ने कहा कि मनरेगा के तहत महिलाओं को रोजगार सुनिश्चित हो और साथ ही उन्हें घर और रसोई की सफाई के लिए ट्रेनिंग दी जाए।
इस काम में एनजीओ का सहयोग लें और गांवों के सौंदर्यीकरण के लिए आर्किटेक्ट कॉलेज के छात्रों का सहयोग लिया जाए। पर्यावरण संरक्षण के लिए अधिक से अधिक पौधे लगाएं और एनजीओ से सहयोग से सोलर लाइट्स और बायो-गैस प्लांट्स लगाने की दिशा में काम किया जाए। छात्रों को प्रेरित करें कि वह अपनी किताबें, खिलौने, कपड़े बेबस बच्चों के साथ बांटें। इसके साथ ही पौष्टिक भोजन, क्राफ्ट सिखाने जैसे कार्यों के बारे में सरकार सुझाव दे, जिससे ये महिलाएं अपने लिए आय की व्यवस्था कर सकें।
इनके बनाए उत्पादों को प्रमोट किया जाए। हाईकोर्ट ने हरियाणा के लिए एडिशनल एडवोकेट जनरल प्रवीण चौहान को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया है। इसके साथ ही एक कमेटी का भी गठन भी किया, जिसमें डिप्टी एजी हिम्मत सिंह सहित गौरव बंसल और रमेश कुमार को शामिल किया गया है। पंजाब के लिए पंजाब की एडिशनल एजी रीटा कोहली को एमिकस क्यूरी नियुक्त कर दिया है।