नोटबंदी का असर, पाकिस्तान से लौटे श्रद्धालु
500 और 1000 के नोट बंद होने से 'भगवान' को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। नोटबंदी ने लोगों का पाकिस्तान तक पीछा किया। हुआ यूं कि स्थान गुरुद्वारा ननकाना साहिब (पाकिस्तान ) के लिए के 1249 श्रद्धालुओं का जत्था रवाना हुआ, जिसमें से 500 को वापिस लौटना पड़ा। कारण, करंसी का न चलना था।
पत्रकारों से बातचीत दौर श्रद्धालुओं बलजीत कौर, हरतेज सिंह, जालंधर निवासी जागीर सिंह ने बताया कि वे बड़े चाव से जाने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन अचानक आई करंसी की समस्या के चलते पैसे न होने की सूरत में वे वापस लौट रहे हैं।
उनके अनुसार शिरोमणि कमेटी की ओर से उन्हें करंसी बदलकर देने का पूरा भरोसा दिया गया था, लेकिन ऐसा न होने के चलते वे वापस लौटने को मजबूर हैं।
सरकार और दूतावास ने पहले ही काट दिए थे कुछ के नाम
नोटबंदी का असर, पाकिस्तान से लौटे श्रद्धालु
शिरोमणि कमेटी अध्यक्ष प्रो.कृपाल सिंह बडूंगर ने बताया कि इस बार शिरोमणि कमेटी की ओर से गुरु नानक देव का प्रकाशोत्सव मनाने के लिए पाकिस्तान जाने वाले जत्थे के कुल 1355 यात्रियों की सूची केंद्र व पाकिस्तानी दूतावास को वीजे जारी करने के लिए भेजी गई थी, जिसमें से 106 यात्रियों के नाम केंद्र सरकार और पाकिस्तानी दूतावास की ओर से बिना कारण बताए काट दिए गए।
उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं के नाम काटने की बजाय भारत सरकार और पाकिस्तानी दूतावास को सिस्टम ठीक करने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि जत्था विभिन्न गुरुधामों के दर्शन करके 21 नवंबर को वतन वापस लौटेगा।
कपाल मोचन जा रहे श्रद्धालु बीच रास्ते अटके
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हरियाणा में भी नोट की चोट लोगों की श्रद्धा पर भी भारी पड़ने लगी है। नोटों की किल्लत के चलते मन्नतें मांगने के लिए धार्मिक स्थलों पर भी लोग नहीं जा पा रहे हैं तो वहीं मंदिरों में भी पिछले तीन दिनों से चढ़ावा कम होने का आकलन किया जा रहा है।
छोटे नोट न होने व बड़े नोटों को लेने से रोडवेज कर्मियों के इनकार के चलते पंजाब के ही सैकड़ों श्रद्धालु यमुनानगर के ऐतिहासिक कपाल मोचन मेले में जाने से भी वंचित रह गए हैं। वे बीच रास्तों में भी अटके हुए हैं।
श्रद्धालुओं की चिंता भी बढ़ गई है कि वे आखिर अपने घर भी वापस कैसे जाएं। श्रद्धालुओं की इस चिंताजनक स्थिति का खुलासा कुरुक्षेत्र बस अड्डे तक पहुंचे पंजाब के खनौरी के बनारसी गांव निवासी महेंद्र व उसके साथ आई दो वृद्धा महिलाओं ने किया।
घंटे भर तक बस अड्डे पर ही बैठे रहे महेंद्र व वृद्ध महिलाओं ने बताया कि वह कपाल मोचन मेले में हर वर्ष जाते हैं और उनकी इस मेले को लेकर अपार श्रद्धा है। वह यहां तक भी बस परिचालकों की मिन्नतें करते हुए पहुंचे हैं और उनके पास जो भी छोटे नोट थे वह खत्म हो चुके हैं।
बड़े नोट लेने से बस परिचालक स्पष्ट इंकार कर रहे हैं। यहां तक कि वह अपने साथ लाए खाने को भी खा चुके और उन्हें अब कैसे खाना मिल पाएगा, यह भी उनके आगे बड़ा संकट खड़ा हो गया है।