चंडीगढ़। पीजीआई से शुरू सारथी प्रोजेक्ट ने चिकित्सा के क्षेत्र में मिसाल कायम की है। देशभर के 28 राज्य और 8 केंद्र शासित प्रदेश के 1467 अस्पतालों में सारथी प्रोजेक्ट को शुरू करने की मंजूरी दी गई है। संस्थान ने स्वास्थ्य सेवा सुविधा और युवा सहभागिता के लिए सारथी प्रोजेक्ट की 5 मई 2024 को शुरुआत की थी। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और युवा मामले एवं खेल मंत्रालय के संयुक्त समर्थन से यह मंजूरी दी गई है। यह माई भारत पोर्टल पर सूचीबद्ध है।
पीजीआई के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने प्रोजेक्ट सारथी मॉडल पर कहा कि यह मरीजों के लिए अस्पताल में आवागमन को सरल बनाने और युवाओं को सामाजिक योगदान की ओर मोड़ने के उद्देश्यों के साथ शुरू किया गया था। यह प्रोजेक्ट सामुदायिक जुड़ाव के एक विशिष्ट मॉडल के रूप में विकसित हुआ है। इसका उद्देश्य अस्पताल का ऐसा माहौल बनाना है जहां मरीज और उनके तीमारदार मार्गदर्शन, समर्थन और अच्छी जानकारी ले सकें। प्रो. विवेक लाल ने कहा कि पीजीआई की ओर से शुरू किया गया यह कदम राष्ट्रव्यापी आंदोलन बन गया है।
डिप्टी डायरेक्टर पंकज राय बोले- सारथी प्रोजेक्ट के प्रयासों से कई उल्लेखनीय सुधार हुए
डिप्टी डायरेक्टर पंकज राय ने कहा कि शुरुआत में पीजीआई में अस्पताल नेविगेटर और रोगी सहायता की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए प्रोजेक्ट सारथी की शुरुआत की गई थी। पीजीआई और शैक्षणिक संस्थानों के बीच इस सहयोग का उद्देश्य छात्रों को प्रशिक्षित करना और उन्हें तैनात करना था ताकि वह अस्पताल में रोगियों की मदद कर सकें। इसकी शुरुआती सफलता रोगी की उलझन को कम करना, समय दक्षता में सुधार करना और समग्र अस्पताल के अनुभव को बेहतर बनाना रही है। इसने अन्य अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और नीति निर्माताओं का ध्यान आकर्षित किया। 10 कॉलेजों और आठ स्कूलों सहित 18 संस्थानों के कुल 816 छात्रों ने अस्पताल नेविगेशन और सहायता सेवाओं में 50,340 घंटे से अधिक का योगदान दिया है। इन प्रयासों से कई उल्लेखनीय सुधार हुए। इनमें औसत रोगी प्रतीक्षा समय 4.2 घंटे से घटकर 2.8 घंटे रह जाना, रोगी और परिजन संतुष्टि में वृद्धि, कर्मचारियों की कार्यकुशलता में सुधार आदि शामिल है।