पीजीआईएमएस आज अपने शुरुआती वालंटियरों को दो सप्ताह बीतने के बाद दूसरी डोज देने की तैयारी में है। इन वालंटियरों के स्वास्थ्य की स्क्रीनिंग करने के बाद इनको दूसरी डोज दे दी जाएगी। अब तक संस्थान 64 वालंटियरों को कोवैक्सीन की डोज दे कर रिसर्च में शामिल कर चुका है। इन सभी वालंटियरों का स्वास्थ्य बिल्कुल ठीक है। स्वदेशी कोवैक्सीन की रिसर्च के को-इंवेस्टिगेटर डॉ. रमेश वर्मा ने बताया कि गुरुवार देर सायं तक संस्थान 64 वालंटियरों को रिसर्च की डोज दे चुका है। हमारे पास 250 के करीब वालंटियरों का पंजीकरण हुआ है।
पहले चरण के बचे हैं करीब 45 वालंटियर
डॉ. रमेश वर्मा ने बताया कि हम 64 वालंटियरों को वैक्सीन की डोज दे चुके हैं। शुक्रवार को भी दस से 12 वालंटियरों को डोज देने की तैयारी है। हमारा 75 का टारगेट है, इसे हम पूरा कर लेंगे। इसके अलावा शुक्रवार को देश भर में 40 से 45 वालंटियरों को ही डोज दी जानी है। इसमें देखना है कि कौनसा संस्थान कितने वालंटियरों को वैक्सीन की डोज दे पाएगा। बाकी वालंटियरों को हम दूसरे फेज में शामिल कर लेंगे। हमारा फेज वन पूरा होने जा रहा है। शुक्रवार को यह तय हो जाएगा कि पीजीआईएमएस रिसर्च करने वाले संसथानों में किस नंबर पर है।
बोले अधिकारी
कोरोना वैक्सीन की रिसर्च फिलहाल सही चल रही है। अभी तक कोई ऐसा मामला सामने नहीं आया है कि जिसमें किसी का स्वास्थ्य बिगड़ा हो। तीन माह के बाद तय हो जाएगा कि रिसर्च की क्या दिशा रहेगी। हालांकि यह रिसर्च फिलहाल छह माह की है। तीन माह बाद यदि सब ठीक रहा तो वैक्सीन कंपनी लोगों के लिए वैक्सीन निर्माण करना शुरू कर सकती है। इससे अधिक इसके बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता। - डॉ. एचके अग्रवाल, वरिष्ठ फिजिशियन एवं रजिस्ट्रार, पीजीआईएमएस रोहतक
कोरोना वैक्सीन से हमें बहुत उम्मीदें हैं। इस वैक्सीन की रिसर्च में वालंटियर भी उत्साहित हैं। यही वजह है कि संस्थान के पास खासी संख्या में वालंटियर आ गए हैं। सभी वालंटियरों का सैंपल आगे आईसीएमआर के पास भेजा जाएगा, यहां पर अन्य रिसर्च सेंटरों के वालंटियरों के सैंपल भी आएंगे। इसमें जांच के बाद एंटी बाडी के लेवल को देखा जाएगा। इसके बाद खुलासा होगा कि वैक्सीन कितनी सफल रहेगी। - डॉ. ध्रुव चौधरी, को-इंवेस्टिगेटर कोवैक्सीन रिसर्च, पीजीआईएमएस, रोहतक।