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एंटीबायोटिक्स के बेवजह इस्तेमाल पर PGI सख्त

Fri, 22 Jan 2016 01:11 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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एंटीबायोटिक्स के बेवजह इस्तेमाल पर पीजीआई सख्त रुख अपनाया है। पीजीआई ने हाल ही में अपनी तीन यूनिट में आडिट फीडबैक सिस्टम शुरू किया है।
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इसके तहत यूनिट में काम करने वाले डॉक्टरों से पूछा जा रहा है कि उन्होंने एंटीबायोटिक्स की कितनी डोज दी। एंटीबायोटिक्स देने से पहले जांच कराई या नहीं। ऐसे प्रश्नों पर आधारित फार्म डॉक्टरों से भराए जा रहे हैं।

ताकि पता चल सके एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल बनाए गए प्रोटोकॉल से हो रहा है या फिर नहीं। पीजीआई समय-समय पर इंटरनल गाइडलाइंस भी बनाता है। उसमें बताया जाता है कि कहां कितनी और कौन सी एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल करना है।
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50 प्रतिशत मरीजों में एंटीबायोटिक्स के हाईडोज
पीजीआई के डॉक्टर नुसरत शफीक ने बताया कि पीजीआई में रेफर मरीजों में से 50 प्रतिशत ऐसे हैं, जिनमें पहले से ही एंटीबायोटिक्स की हाई डोज होती है। यानी कि जब उनका इलाज किसी प्राइवेट या सरकारी अस्पताल में चल रहा होता तो उन्हें एंटीबायोटिक्स की काफी डोज दी जा चुकी होती है। डॉक्टरों को एंटीबायोटिक्स के इस्तेमाल का सही से पता नहीं है। इससे यहां के डाक्टरों को इलाज में काफी मुश्किलें आती हैं। दवाएं बेअसर हो जाती हैं। सर्जरी में भी काफी दिक्कतें आती हैं।

डेंगू, डायरिया में ज्यादा इस्तेमाल
डॉक्टरों ने बताया कि जो बीमारियां साधारण सी दवा से ठीक हो सकती हैं। उसमें भी एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल किया जा रहा है। खासतौर पर कॉमन कोल्ड व डायरिया में। इनमें अधिकतर केसों में एंटीबायोटिक्स का बेवजह इस्तेमाल किया जा रहा है।

हाल ही में डेंगू के मामले भी सामने आया है कि उसमें एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल ज्यादा किया गया। दिल्ली में हुई स्टडी में इसका खुलासा भी हो चुका है। डेंगू के 99 प्रतिशत से ज्यादा केस पैरासिटामॉल से ठीक हो सकते हैं। अगर डेंगू के साथ कुछ और है तो उसके लिए एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल किया जा सकता है।

लोगों को भी जागरूक रहने की जरूरत
डॉक्टरों ने बताया कि लोगों को जागरूक होने की जरूरत है। उन्हें डॉक्टरों से पूछना चाहिए कि उनके इलाज में एंटीबायोटिक्स की जरूरत है या नहीं। डॉक्टरों ने बताया कि इस संबंध में 25 जनवरी को शाम साढ़े चार बजे नाइन के ऑडिटोरियम में एक पब्लिक फोरम कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इसमें कोई भी व्यक्ति भाग ले सकता है और एंटीबायोटिक से संबंधित सवाल-जवाब कर सकता है।
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आप बच सकते हैं ऐसे
1. अपनी तरफ से कोई भी दवा न लें।
2. फार्मासिस्ट से भी दवा न लें।
3. डॉक्टर कोई भी दवा देता है तो उसका पूरा कोर्स जरूर करें।
4. बची दवाएं किसी को देने के बजाय केमिस्ट शॉप को दें।
5. जब भी दवा चले तो उसका रिकॉर्ड जरूर रखें।

क्या होता है नुकसान
एंटीबायोटिक्स के अंधाधुंध प्रयोग से शरीर में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है। उसके बाद रोग पर दवाइयां बेअसर होने लगती है। फिर डॉक्टर की ओर से हाई डोज की एंटीबायोटिक्स दी जाती है। लेकिन कुछ दिन बाद वह भी बेअसर होने लगती है। ऐसे में रोगी की मौत तक हो जाती है। इसलिए जब जरूरत हो तभी एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल किया जाना चाहिए और इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक गाइडलाइंस बनाने की जरूरत है। ताकि पब्लिक, फार्मासिस्ट, डाक्टर और नर्सें सहित सभी अवेयर हो पाएं।
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