फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पीजीआई ने पीयू से अलग होकर एमएससी न्यूक्लियर मेडिसिन कोर्स किया शुरू

विज्ञापन
विज्ञापन
चंडीगढ़। पीजीआई ने एमएससी न्यूक्लियर मेडिसिन टेक्नोलॉजी कोर्स (2022-24) में प्रवेश की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसका हवाला देते हुए पंजाब यूनिवर्सिटी में सेंटर फार न्यूक्लियर मेडिसिन में संचालित एमएससी दो वर्षीय कोर्स पर रोक लगा दी है। दो दिन पहले तक इस कोर्स के लिए पीयू के पास 80 से ज्यादा छात्रों के आवेदन आ चुके थे। वहीं, लगभग 38 छात्रों ने अपनी फीस जमा करवा दी थी। पीयू ने उसे रिफंड की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
विज्ञापन

पंजाब यूनिवर्सिटी के डीन यूनिवर्सिटी इंस्ट्रक्शंस प्रो. रेणु विग की ओर से बुधवार को प्रेस बयान जारी कर बताया कि पीजीआई ने एमएससी न्यूक्लियर मेडिसिन कोर्स स्वतंत्र रूप से शुरू करने और पीयू के साथ संयुक्त रूप से एमएससी कार्यक्रम को बंद करने की सूचना पत्र के जरिए 3 अप्रैल को दी थी लेकिन पीयू की ओर से सत्र 2021-22 के छात्रों की ट्रेनिंग करवाने के अनुरोध को पीजीआई ने स्वीकार किया था।
प्रो. रेणु विग ने बताया कि पीजीआई की ओर से अपना कोर्स शुरू करने और पीयू के साथ चल रहे ज्वांइट कोर्स को खत्म करने का कारण है कि पीयू के सेंटर में सिर्फ एक ही शिक्षक है इसलिए पर्याप्त शिक्षण नहीं हो पाता और छात्रों का भविष्य संकट में रहता है। पूरे देश के संस्थानों में एमएससी न्यूक्लियर मेडिसिन कोर्स में दो साल की क्लीनिकल ट्रेनिंग दी जाती है इसलिए यहां एक साल के कोर्स के दूसरे वर्ष में पीजीआई की ओर से दी जा रही ट्रेनिंग छात्रों के लिए पर्याप्त नहीं है। पीजीआई पहले से भर्ती 2021-23 बैच के छात्रों की एक साल की ट्रेनिंग करवाने के लिए सहमत हुआ है। यह ट्रेनिंग जुलाई 2022 से शुरू होकर जून 2023 तक चलेगी। इसलिए पीयू ने छात्रों के हित को देखते हुए वर्तमान में कोर्स में दाखिला पर रोक लगा दी है। पीयू यूजीसी और नैक की सिफारिशों पर बड़े विभागों के साथ ऐसे छोटे विभागों के विलय पर काम कर रहा है।
विज्ञापन

पुटा ने कहा-कोर्स बंद करने के बजाय शिक्षक करते नियुक्त
पुटा के अध्यक्ष डॉ. मृत्युंजय ने बताया कि देश के सबसे प्रतिष्ठित कोर्स को बंद कर पीयू प्रशासन संस्थान का नाम खराब करने की कोशिश कर रही है। यह कोर्स उचित पॉलिसी के जरिए शुरू किया गया था और बिल्डिंग इत्यादि को कोर्स के मुताबिक तैयार करने में करोड़ों खर्च किया गया था। शिक्षक की कमी का हवाला देकर कोर्स बंद करना निंदनीय है। पीजीआई अपने स्तर पर कोर्स की शुरुआत कर रहा है यह सराहनीय है। पीयू को भी यूजीसी के निर्देशानुसार विभाग में कम से कम पांच से छह शिक्षक नियुक्त कर कोर्स का अच्छे से संचालन करना चाहिए था। इस मुद्दे को लेकर पुटा के पांच सदस्यों ने विभागाध्यक्ष के साथ मिलकर बुधवार को डीयूआई और शोध निदेशक से मुलाकात की थी। पुटा ने वीसी से मुलाकात की कोशिश भी की लेकिन उन्होंने समय का हवाला देकर बैठक नहीं की। पुटा ने कहा कि पीयू प्रशासन ने कोर्स को जारी रखने की कोशिश ही नहीं की वे इसे बंद करने में लगे हैं। पीजीआई के साथ संवाद किया जाना चाहिए था। जानकारी के अनुसार न्यूक्लियर मेडिसिन सेंटर के लिए बनाई सभी कमेटियों को बुधवार को रि-कंस्टीट्यूट कर दिया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें