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बच्चों में डायबिटीज के कारण खोजेगा पीजीआई

Thu, 14 Nov 2013 12:43 AM IST
अमर उजाला, चंडीगढ़
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अगर ये कहें कि डायबिटीज उम्रदराज लोगों को ही अपना शिकार बना रही तो यह गलत होगा। आजकल बच्चों में भी यह बीमारी बढ़ने लगी है।
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इतना ही नहीं 2 से 3 साल तक की उम्र के बच्चे भी डायबिटीज के शिकार हो रहे हैं। चिंता की बात यह है कि अभी तक इसके वास्तविक कारणों का पता नहीं चला है।

अब पीजीआई के एंडोक्रिनोलॉजी विभाग के डॉ.नरेश सचदेव इसके कारणों को खोजने की पहल कर रहे हैं। डॉ.नरेश का कहना है कि बच्चों में टाइप-1 डायबिटीज होती है।

उन्होंने पीजीआई में आने वाले डायबिटिक बच्चों का रिकॉर्ड तैयार किया है। इसमें इस बीमारी के प्रकार और अन्य जानकारियों पर वे अध्ययन कर रहे हैं।

इसके अलावा वह डायबिटिक बच्चों के शरीर में टी-सेल्स के परिवर्तनों पर भी अध्ययन कर रहे हैं। ये सेल शरीर में इंफेक्शन को रोकने का काम करते हैं।

इन सब तथ्यों को लेकर डॉ. नरेश ने एक डाटा तैयार किया है, जिसको वह अगले महीने इम्यूनोलॉजी ऑफ डायबिटीज सोसायटी द्वारा कराई जा रही कांफ्रेंस में पेश करेंगे। ये कांफ्रेंस 7 से 10 दिसंबर तक मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया में होगी।

बच्चों में खत्म हो जाते हैं बीटा सेल्स
डॉ.नरेश ने बताया कि जब बीमारी का पता लगता है तब तक ये 95 फीसदी फैल चुकी होती है। उनके मुताबिक, कुछ बच्चों में इंफेक्शन को रोकने वाले टी-सेल्स, बीटा सेल्स को खत्म करने लगते हैं।
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ऐसा होने से बच्चों में इंसुलिन की मात्रा कम होनी शुरू हो जाती है। ऐसे में वे टाइप-1 डायबिटीज की चपेट में आ जाते हैं।

डॉक्टर जब इसकी जांच करते हैं, तब तक बीटा सेल 95 फीसदी तक खत्म हो चुके होते हैं। डॉ.नरेश के मुताबिक, अभी तक ये पता नहीं लग सका है कि टी-सेल, बीटा सेल्स को खत्म क्यों करते हैं?
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हर महीने 10 से 15 नए मरीज
डॉ.नरेश के मुताबिक, बच्चों में टाइप-1 डायबिटीज का प्रसार तेजी से हो रहा है। पीजीआई में हर महीने 10 से 15 नए मामले सामने आते हैं।

इनकी औसत उम्र 4 से 14 साल तक होती है। सबसे ज्यादा मामले चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा से आ रहे हैं। टाइप-1 डायबिटीज के शिकार बच्चों को दिन में 2 से 4 बार इंसुलिन के इंजेक्शन लगवाने पड़ते हैं।
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