चंडीगढ़। पीजीआई सफाई कर्मचारी यूनियन में चल रहे विवाद पर अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। सिविल जज (जूनियर डिवीजन) अजय की अदालत ने यूनियन के दोनों पक्षों को फटकार लगाते हुए बिना वैध अधिकार के चुनाव कराने और यूनियन की ओर से काम करने पर रोक लगा दी है। साथ ही यूनियन के संविधान के अनुसार जल्द चुनाव कराने के निर्देश दिए हैं।
यह आदेश सिविल जज (जूनियर डिवीजन) की अदालत ने 9 मार्च को पीजीआई सफाई कर्मचारी यूनियन बनाम राज कुमार बल्लू व अन्य मामले में सुनाया। अदालत ने कहा कि यूनियन के संविधान में कार्यकारिणी का कार्यकाल बढ़ाने का कोई प्रावधान नहीं है। इसलिए बिना चुनाव के कार्यकाल बढ़ाने का फैसला मान्य नहीं माना जा सकता।
याचिका में यूनियन के तत्कालीन अध्यक्ष सुनील कुमार की ओर से कहा गया था कि कुछ सदस्य बिना अधिकार समानांतर चुनाव कराने की कोशिश कर रहे हैं और यूनियन की मुहर का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं, प्रतिवादी पक्ष ने अदालत में दावा किया कि कार्यकारिणी ने सदस्यों के हस्ताक्षर लेकर गलत तरीके से 15 सितंबर 2025 को कार्यकाल बढ़ाने का प्रस्ताव पारित किया। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि यूनियन का कार्यकाल समाप्त हो चुका है और संविधान में बिना चुनाव के कार्यकाल बढ़ाने का कोई प्रावधान नहीं है। साथ ही राज कुमार बल्लू के चुनाव समिति के अध्यक्ष होने का भी कोई वैध रिकॉर्ड अदालत में प्रस्तुत नहीं किया गया।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि दोनों पक्ष यूनियन के संविधान से बाहर जाकर काम कर रहे हैं। इसलिए प्रतिवादियों को बिना वैध अधिकार के चुनाव कराने या उसमें भाग लेने से रोका जाता है। वहीं सुनील कुमार को भी नई कार्यकारिणी बनने तक यूनियन की ओर से काम करने से रोक दिया गया है। अदालत ने निर्देश दिए कि यूनियन के संविधान के अनुसार चुनाव अधिकारी और चुनाव समिति बनाकर जल्द निष्पक्ष चुनाव कराए जाएं। मामले की अगली सुनवाई 29 मई 2026 को होगी।
बॉक्स: कोर्ट के मुख्य निर्देश
बिना वैध अधिकार के यूनियन चुनाव कराने या उसमें भाग लेने पर रोक
सुनील कुमार को नई कार्यकारिणी बनने तक यूनियन की ओर से काम करने से रोका
संविधान के अनुसार चुनाव अधिकारी और चुनाव समिति बनाने के निर्देश
यूनियन के नियमों के तहत जल्द चुनाव कराने को कहा
मामले की अगली सुनवाई 29 मई 2026 को होगी।