गुप्ता मेडिकोज 16 सितंबर को दे चुका है जवाब
पीजीआई में प्रोपोफोल से मरीजों की मौत के मामले में मांगे गए स्पष्टीकरण के बाद इमरजेंसी स्थित गुप्ता मेडिकोज के संचालक ने 16 सितंबर को ही अपना जवाब सौंप दिया था। इसमें गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेज रिपोर्ट के साथ डब्ल्यूएचओ की ओर से सर्टिफिकेट ऑफ गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेज व संबंधित कंपनी से ली गई दवा की गुणवत्ता का प्रमाणपत्र संलग्न किया था लेकिन पीजीआई की क्लीनिकल जांच कमेटी की रिपोर्ट अब तक नहीं आई है। पीजीआई प्रशासन के अनुसार मामले में हुई मौतों पर कारणों की जांच के लिए एनेस्थीसिया विभाग के प्रमुख के नेतृत्व में कमेटी का गठन किया गया था। हालांकि, इस टीम के गठन के एक महीने गुजर जाने के बाद भी रिपोर्ट का इंतजार हो रहा है।
जीएमसीएच-32 भी मान चुका है दवा का नुकसान
पीजीआई में मौत का मामला सामने आने के कुछ दिनों बाद जीएमसीएच-32 प्रशासन ने भी माना था कि उनके यहां भी प्रोपोफोल के प्रयोग से कुछ मरीजों को नुकसान हुआ है। जीएमसीएच-32 के तत्कालीन कार्यवाहक चिकित्सा अधीक्षक प्रो. जीपी थामी ने बताया था 29 अगस्त को सूचना मिली थी कि सर्जरी के बाद दो मरीजों की स्थिति बिगड़ गई है।
जांच में पाया गया कि दवा दो अलग-अलग जगहों से आपूर्ति की गई थी। इनमें से कुछ की शीशियों पर लिपिड की बूंदें मिली थीं। दोनों ही स्टॉक में से दो तिहाई शीशियों का इस्तेमाल किया जा चुका था लेकिन दो मरीजों पर इसका दुष्प्रभाव नजर आया। ऐसा होने पर संबंधित दवा कंपनी को सूचना दी गई और उसने सारे स्टॉक वापस ले लिए थे। इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग को नहीं दी गई। हालांकि उन दोनों मरीजों की किडनी और लीवर पर पड़े दुष्प्रभाव को समय रहते नियंत्रित कर लिया गया और उनकी अब छुट्टी भी हो चुकी है।
बेहोशी की दवा प्रकरण में अब तक न तो दवा के नमूनों की जांच रिपोर्ट आई है और न ही पीजीआई की ओर से गठित डॉक्टरों की कमेटी की रिपोर्ट मिली है। - कुमार गौरव, डीडीए व पीजीआई प्रवक्ता